Logo

6 साल फरार आरोपी को राहत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाईकोर्ट का अग्रिम जमानत आदेश रद्द

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

बालमुकुंद सिंह गौतम बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने 6 साल से फरार आरोपी को मिली अग्रिम जमानत रद्द की, कहा– फरार व्यक्ति को नहीं मिल सकती विशेष राहत।

6 साल फरार आरोपी को राहत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाईकोर्ट का अग्रिम जमानत आदेश रद्द

दिल्ली में सुनवाई के दौरान माहौल गंभीर था। मामला एक राजनीतिक रंजिश से जुड़ी गोलीबारी और हत्या का था। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा-“जो व्यक्ति वर्षों तक कानून से भागता रहा, वह सिर्फ सह-आरोपियों के बरी होने का लाभ नहीं उठा सकता।”

यह मामला Balmukund Singh Gautam v. State of Madhya Pradesh से जुड़ा है।

Read also:-फर्जी 12वीं प्रमाणपत्र से वकालत का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता की जमानत खारिज की

मामले की पृष्ठभूमि

2 जून 2017 को इंदौर-धार क्षेत्र में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई। शिकायत के अनुसार, लौटते समय वाहन रोककर हमला किया गया, गोलियां चलीं और एक व्यक्ति की मौत हो गई। कई लोग घायल हुए। बाद में हत्या की धारा 302 भी जोड़ी गई।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

इसी घटना को लेकर तीन एफआईआर दर्ज हुईं-एक शिकायतकर्ता की ओर से, दूसरी मुख्य घटना से जुड़ी, और तीसरी क्रॉस एफआईआर। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी घटना के दिन से ही फरार था। उसके खिलाफ इनाम भी घोषित किया गया।

ट्रायल के दौरान अन्य सह-आरोपी बरी हो गए। लेकिन आरोपी की जांच अलग से लंबित रही क्योंकि वह पेश नहीं हुआ।

Read also:-सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: असम के रिजर्व फॉरेस्ट में बेदखली पर रोक, पहले सुनवाई फिर कार्रवाई

हाईकोर्ट का आदेश

जनवरी 2024 में आरोपी ने तीसरी बार अग्रिम जमानत याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने कहा कि सह-आरोपियों को बरी किया जा चुका है और अभियोजन ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। इस आधार पर अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करे और उसी दिन उसे नियमित जमानत दे दी जाए।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके निष्कर्ष केवल जमानत के विचार तक सीमित हैं।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

मूल शिकायतकर्ता ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। दलील दी गई कि आरोपी छह साल से अधिक समय तक फरार रहा, जांच में सहयोग नहीं किया और गवाह को धमकाने का भी आरोप है।

राज्य सरकार ने भी सुनवाई में कहा कि आरोपी पर इनाम घोषित था और उसके खिलाफ अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।

Read also:-सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आर्बिट्रेशन अवॉर्ड के बाद खरीदी संपत्ति भी कुर्क होगी, मां की अपील खारिज

अदालत की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने साफ शब्दों में कहा, “अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है। यह उन लोगों के लिए नहीं है जो कानून की प्रक्रिया से बचते रहे हों।”

कोर्ट ने यह भी जोड़ा, “सह-आरोपियों के बरी होने का लाभ उस व्यक्ति को स्वतः नहीं मिल सकता, जिसने खुद मुकदमे का सामना ही नहीं किया।”

पीठ ने माना कि आरोपी ने न तो जांच में सहयोग किया और न ही समय पर अदालत में पेश हुआ। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा सिर्फ बरी होने के आधार पर राहत देना “गलत और अविवेकपूर्ण” था।

कानूनी सिद्धांत पर जोर

फैसले में अदालत ने दो अहम बातें दोहराईं-

1. फरार व्यक्ति को सामान्यतः अग्रिम जमानत का अधिकार नहीं होता।

2. जमानत देते समय अदालत को अपराध की गंभीरता, आरोपी का आचरण और गवाहों पर प्रभाव जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत का उद्देश्य “मनमानी गिरफ्तारी से सुरक्षा” है, न कि “कानून से बचने का लाइसेंस।”

Read also:-₹30 करोड़ फिल्म फंड घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से विक्रम भट्ट और पत्नी को अंतरिम जमानत, अगली सुनवाई 19 फरवरी

अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी 2024 का हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। आरोपी को चार सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण के बाद वह नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकता है, जिसे कानून के अनुसार तय किया जाएगा।

इसी के साथ अपील स्वीकार कर ली गई।

Case Title: Balmukund Singh Gautam v. State of Madhya Pradesh & Anr.

Case No.: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 15349 of 2024

Decision Date: 13 February 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates