Logo

सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक केस में पेन ड्राइव मंगवाई, ट्रांसक्रिप्ट पर जताई गंभीर शंका

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

गीतांजलि जे. अंगमो बनाम भारत संघ एवं अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक नजरबंदी मामले में पेन ड्राइव सीलबंद मंगवाई, भाषण ट्रांसक्रिप्ट की सटीकता पर सवाल उठाए।

सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक केस में पेन ड्राइव मंगवाई, ट्रांसक्रिप्ट पर जताई गंभीर शंका

दिल्ली की ठंडी सुबह में सुप्रीम कोर्ट कक्ष संख्या में हलचल कुछ ज़्यादा थी। मुद्दा था लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की नजरबंदी का। कोर्ट ने सोमवार को एक अहम आदेश देते हुए कहा कि हिरासत के दौरान वांगचुक को जो पेन ड्राइव दी गई थी, उसे सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने पेश किया जाए।

पीठ ने यह भी साफ किया कि भाषणों के अनुवाद (ट्रांसक्रिप्ट) की शुद्धता पर उसे गंभीर संदेह है।

Read also:-पुराने आपराधिक मामले के बावजूद नौकरी का हक: गुजरात HC ने भर्ती रोके जाने का आदेश किया रद्द

मामले की पृष्ठभूमि

वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। आरोप था कि उनके भाषणों से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

उनकी पत्नी गितांजलि जे. अंगमो ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर इस नजरबंदी को चुनौती दी है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि नजरबंदी आदेश में जिन चार वीडियो भाषणों का हवाला दिया गया है, वे उस पेन ड्राइव में मौजूद ही नहीं थे जो 29 सितंबर को वांगचुक को दी गई।

सिब्बल ने अदालत से कहा, “जिस सामग्री के आधार पर किसी को बंद किया गया है, वही सामग्री अगर दी ही नहीं गई, तो आदेश कानूनी रूप से टिक नहीं सकता।”

कोर्ट की कार्यवाही और सवाल

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मामले को गंभीरता से सुना।

न्यायमूर्ति कुमार ने पूछा, “अगर अनुवाद पर ही आपका भरोसा है, तो वह नजरबंदी आदेश में साफ क्यों नहीं दिखता? जिस आधार पर राय बनाई गई, वह रिकॉर्ड में होना चाहिए।”

न्यायमूर्ति वराले ने तो अनुवाद की लंबाई और मूल भाषण की अवधि पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने मौखिक टिप्पणी में कहा, “कम से कम सही ट्रांसक्रिप्ट तो होना चाहिए। अगर भाषण तीन मिनट का है और अनुवाद दस मिनट का, तो स्पष्ट है कि कहीं न कहीं बड़ा अंतर है।”

कोर्ट ने कहा कि वह वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट देखना चाहती है, जिस पर नजरबंदी प्राधिकरण ने भरोसा किया।

Read also:-मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी को ज़हर देने का मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने माता-पिता की उम्रकैद बरकरार रखी

पेन ड्राइव पर अदालत का आदेश

अदालत ने निर्देश दिया कि जो पेन ड्राइव वांगचुक की हिरासत में है, उसे जेल अधीक्षक उनकी मौजूदगी में सीलबंद करें और सीलबंद बॉक्स में सुप्रीम कोर्ट भेजें।

पीठ ने आदेश में दर्ज किया कि अतिरिक्त महाधिवक्ता, राजस्थान इस प्रक्रिया के पालन को सुनिश्चित करेंगे।

यह आदेश इसलिए आया क्योंकि सिब्बल ने कहा कि जिन वीडियो का हवाला दिया गया, वे पेन ड्राइव में नहीं थे और वांगचुक ने कई बार उन्हें उपलब्ध कराने की मांग की थी।

केंद्र सरकार का पक्ष

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पहले कहा था कि वांगचुक को सभी सामग्री दिखाई गई थी और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी हुई। उन्होंने यह भी दलील दी कि NSA एक निवारक कानून है - इसका उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि संभावित खतरे को रोकना है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि नजरबंदी आदेश के सभी आधार स्वतंत्र हैं। अगर एक आधार गिर भी जाए, तो बाकी आधार आदेश को कायम रख सकते हैं।

केंद्र ने यह भी तर्क दिया कि भाषणों से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में “अशांति की स्थिति” पैदा हो सकती थी।

याचिकाकर्ता की आपत्ति

दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नजरबंदी आदेश में “दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया गया” और पुराने मामलों तथा संदर्भ से काटे गए अंशों पर भरोसा किया गया।

सिब्बल ने साफ शब्दों में कहा, “कहीं भी ऐसा उदाहरण नहीं है जहां उन्होंने हिंसा के लिए उकसाया हो। बल्कि जब हिंसा हुई, तो उन्होंने अनशन तोड़कर शांति की अपील की।”

Read also:-पुराने आपराधिक मामले के बावजूद नौकरी का हक: गुजरात HC ने भर्ती रोके जाने का आदेश किया रद्द

अदालत का निर्णय

सुनवाई के अंत में पीठ ने पेन ड्राइव को सीलबंद रूप में मंगवाने और वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट पेश करने का निर्देश दिया।

मामले को आगे की दलीलों के लिए गुरुवार को सूचीबद्ध किया गया है। फिलहाल अदालत ने साफ कर दिया है कि वह मूल रिकॉर्ड देखे बिना आगे नहीं बढ़ेगी।

Case Title: Gitanjali J. Angmo v. Union of India & Ors.

Case No.: W.P. (Crl.) No. 399/2025

Decision Date: February 16, 2026

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates