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31 साल से लंबित संपत्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बॉम्बे हाईकोर्ट को मामले की जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने का निर्देश

Vivek G.
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जिमी दारा सुखिया बनाम रोशनी फारुख चिनॉय, 31 साल पुराने संपत्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, बॉम्बे हाईकोर्ट को जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने का निर्देश

31 साल से लंबित संपत्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बॉम्बे हाईकोर्ट को मामले की जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने एक लंबे समय से लंबित संपत्ति विवाद को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि किसी दीवानी मुकदमे का तीन दशक तक लंबित रहना न्याय प्रणाली के लिए उचित नहीं है। अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि वह इस मामले से संबंधित आदेश को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखे ताकि लंबित कार्यवाही पर जल्द सुनवाई हो सके और मूल मुकदमे का निपटारा हो सके।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला पुणे स्थित एक संपत्ति को लेकर पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता जिमी दारा सुखिया और प्रतिवादी रोशनी फारुख चिनॉय के बीच यह विवाद कई वर्षों से चल रहा है।

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मामले की जड़ 1995 में दायर एक दीवानी मुकदमे (सूट नंबर 430/1995) में है, जिसमें संपत्ति के बंटवारे और अधिकार को लेकर विवाद उठाया गया था। इसके अलावा, लाइसेंस समाप्त होने के बाद कब्जा वापस लेने को लेकर भी कार्यवाही शुरू हुई थी।

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अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, संपत्ति पहले दारा बायरामजी सुखिया की थी, जिन्होंने 1955 में एक वसीयत के जरिए संपत्ति अपनी पत्नी दीना दारा सुखिया को दे दी थी। बाद में परिवार के भीतर रिश्तों में तनाव बढ़ने के बाद विवाद पैदा हुआ और संपत्ति पर कब्जे को लेकर मुकदमे शुरू हो गए।

पहले के फैसलों का संदर्भ

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2021 के आदेश का भी उल्लेख किया। उस आदेश में अदालत ने कहा था कि 1995 में दायर मुकदमा 26 वर्षों तक लंबित रहना असामान्य स्थिति है।

तब अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करे और एक वर्ष के भीतर फैसला देने का प्रयास करे।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि छोटे कारणों की अदालत (Small Causes Court) केवल लाइसेंस समाप्त होने के बाद कब्जे के सवाल पर फैसला कर सकती है, जबकि संपत्ति के वास्तविक स्वामित्व और उत्तराधिकार का मुद्दा सिविल कोर्ट में लंबित मुकदमे में तय होगा।

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अदालत की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि पहले दिए गए निर्देश के बावजूद मुकदमा अब तक तय नहीं हो पाया है।

पीठ ने कहा,

“आदेश के स्पष्ट निर्देश के बावजूद लगभग पाँच वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक मुकदमे का निपटारा नहीं हुआ है।”

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट में दायर एक रिवीजन याचिका में पारित अंतरिम आदेशों के कारण ट्रायल कोर्ट आगे कार्यवाही नहीं कर पा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

इन परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि वह इस आदेश को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करें।

अदालत ने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि हाईकोर्ट में लंबित कार्यवाही पर जल्द सुनवाई हो सके और इसके बाद ट्रायल कोर्ट में लंबित 1995 का मुकदमा भी आगे बढ़ सके।

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अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को लंबित मुकदमे के निपटारे के लिए अतिरिक्त छह महीने का समय देने का आदेश दिया। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि संबंधित कार्यवाही को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाए।

इसी निर्देश के साथ अदालत ने दायर की गई मिसलेनियस आवेदन (Miscellaneous Application) का निपटारा कर दिया।

Case Title: Jimmy Dara Sukhia vs Roshani Farokh Chinoy

Case No.: Miscellaneous Application No. 333/2026 in C.A. No. 2852/2021

Decision Date: 25 February 2026

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