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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन: 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' अध्याय वाली NCERT किताब पर पूर्ण प्रतिबंध

Vivek G.
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सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की NCERT किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय पर रोक लगाते हुए अवमानना नोटिस जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन: 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' अध्याय वाली NCERT किताब पर पूर्ण प्रतिबंध

देश की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को एक सख्त रुख अपनाते हुए कक्षा 8 की एनसीईआरटी सामाजिक विज्ञान की उस किताब पर पूरी तरह रोक लगा दी, जिसमें “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” से जुड़ा अध्याय शामिल था।

पीठ की अगुवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश ने इसे “गहरी साजिश” बताते हुए साफ कहा कि जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी और जवाबदेही तय होगी। अदालत ने इस मामले में अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू करने का भी संकेत दिया है।

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मामला क्या है?

विवाद कक्षा 8 की पुस्तक Exploring Society: India and Beyond (Vol. 2) के एक अध्याय को लेकर उठा। इस अध्याय में न्यायपालिका की भूमिका के साथ-साथ “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” और मामलों की लंबित संख्या का जिक्र किया गया था।

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मीडिया में खबरें सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस मुद्दे को अदालत के सामने रखा। अदालत ने स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की।

अदालत की सख्त टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान पीठ में शामिल

• सूर्यकांत

• जॉयमाल्या बागची

• विपुल एम पंचोली

ने पुस्तक की भाषा और प्रस्तुति पर गंभीर आपत्ति जताई।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा,

“हमें इसकी गहराई से जांच करनी होगी। यह पता लगाना जरूरी है कि इसके पीछे कौन लोग हैं। जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। हम इस मामले को बंद नहीं करेंगे।”

अदालत ने टिप्पणी की कि किताब में न्यायपालिका के ऐतिहासिक योगदान और संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का उल्लेख नहीं है।

पीठ ने कहा,

“ऐसा प्रतीत होता है कि यह संस्थागत गरिमा को कमज़ोर करने की एक सोची-समझी कोशिश है। अगर इसे अनदेखा किया गया तो इससे युवाओं के मन में न्यायपालिका की छवि प्रभावित होगी।”

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हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य वैध आलोचना को दबाना नहीं है।

“हम आलोचना को रोकना नहीं चाहते। स्वस्थ विमर्श संस्थाओं को मजबूत करता है। लेकिन छात्रों को एकतरफा और पक्षपाती सामग्री देना उचित नहीं है।”

अवमानना नोटिस और प्रतिबंध

अदालत ने शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग और एनसीईआरटी निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया। उनसे पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए।

साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि-

• पुस्तक के प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

• सभी भौतिक (हार्ड कॉपी) और डिजिटल (सॉफ्ट कॉपी) प्रतियां तुरंत जब्त की जाएं।

• स्कूलों में इस किताब के आधार पर कोई पढ़ाई न कराई जाए।

• सभी राज्यों के शिक्षा विभाग दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें।

अदालत ने चेतावनी दी,

“अगर इस किताब को किसी भी रूप में वितरित किया गया तो इसे अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना माना जाएगा।”

लेखन करने वालों की जानकारी मांगी

पीठ ने एनसीईआरटी निदेशक को निर्देश दिया कि वे उस राष्ट्रीय पाठ्यक्रम बोर्ड के सदस्यों के नाम और योग्यता बताएं, जिन्होंने विवादित अध्याय तैयार किया।

साथ ही उस बैठक की मूल कार्यवाही (minutes) भी पेश करने को कहा गया, जिसमें इस अध्याय को अंतिम रूप दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अनुपालन रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारी तय करने के लिए एक विशेष समूह गठित किया जा सकता है।

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सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी पेश की और कहा कि संबंधित अध्याय वापस ले लिया गया है।

लेकिन पीठ ने एनसीईआरटी की प्रेस विज्ञप्ति पर असंतोष जताया।

“प्रेस नोट में एक शब्द भी माफी का नहीं है,” मुख्य न्यायाधीश ने कहा।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी अध्याय को “एकतरफा” बताया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से सामग्री हटाने की मांग की।

पीठ ने यह भी कहा कि अगर यह साबित हुआ कि सामग्री जानबूझकर न्यायपालिका को बदनाम करने के लिए डाली गई, तो यह आपराधिक अवमानना के दायरे में आ सकता है।

अदालत का अंतिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने-

• किताब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया,

• सभी प्रतियां जब्त करने का आदेश दिया,

• अवमानना नोटिस जारी किया,

• और लेखन से जुड़े सभी व्यक्तियों का विवरण तलब किया।

मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

Case Title: In Re: Social Science Textbook for Grade-8 (Part 2) published by NCERT and ancillary issues

Case No.: SMW (C) 1/2026

Decision Date: February 2026

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