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महिला की सुनवाई बिना सुने केस ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, संगारेड्डी की अदालत को लौटाया आपराधिक मामला

Vivek G.
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प्रसन्ना कासिनी बनाम तेलंगाना राज्य और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी को सुने बिना केस ट्रांसफर को गलत ठहराया, संगारेड्डी की अदालत में आपराधिक मामला वापस भेजा।

महिला की सुनवाई बिना सुने केस ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, संगारेड्डी की अदालत को लौटाया आपराधिक मामला

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आपराधिक अपील में यह साफ कर दिया है कि किसी महिला की अनुपस्थिति में, केवल आशंका के आधार पर केस ट्रांसफर करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पत्नी की शिकायत पर चल रहे आपराधिक मामले को संगारेड्डी से हैदराबाद स्थानांतरित कर दिया गया था, वह भी पत्नी को सुने बिना।

यह फैसला प्रसन्ना कसिनी बनाम तेलंगाना राज्य मामले में आया, जिसमें पत्नी ने हाईकोर्ट के ट्रांसफर आदेश को चुनौती दी थी।

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मामले की पृष्ठभूमि

अपीलकर्ता पत्नी ने संगारेड्डी स्थित अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में अपने पति के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। पति ने यह कहते हुए हाईकोर्ट का रुख किया कि पत्नी के रिश्तेदार पुलिस और अदालत के स्टाफ में कार्यरत हैं, जिससे उसे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी।

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हाईकोर्ट ने पति की दलीलों को स्वीकार करते हुए पत्नी की गैरहाज़िरी में ही मामला हैदराबाद के नामपल्ली स्थित मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में ट्रांसफर कर दिया।

पत्नी की ओर से दलील दी गई कि वह दो छोटे बच्चों के साथ अकेली है और दूर की अदालत में केस लड़ना उसके लिए बेहद कठिन है। साथ ही यह भी कहा गया कि पति ने पहले भी धोखेबाज़ीपूर्ण आचरण अपनाया है।

रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों की शादी 2007 में हुई थी और वे अमेरिका भी गए थे। 2011 में सुलह हुई, लेकिन पति ने कथित रूप से पत्नी को बताए बिना तलाक की कार्यवाही जारी रखी और 2013 में तलाक का आदेश हासिल कर लिया।

पत्नी को तलाक की जानकारी वर्षों बाद 2022 में एक कानूनी नोटिस के जरिए मिली। इसके बाद उसने फिर से आपराधिक शिकायत दर्ज कराई, जो अब ट्रांसफर का विषय बनी।

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अदालत की अहम टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि

“केवल इस आधार पर कि किसी पक्ष का कोई रिश्तेदार पुलिस या अदालत में कार्यरत है, न्यायिक अधिकारी पर पक्षपात का आरोप नहीं लगाया जा सकता।”

पीठ ने यह भी नोट किया कि जिस कर्मचारी के कारण पक्षपात का आरोप लगाया गया था, उसका तबादला पहले ही हो चुका था। ऐसे में ट्रांसफर का आधार कमजोर था।

अदालत ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने पत्नी को सुने बिना आदेश पारित किया, जो न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

पति की ओर से यह तर्क दिया गया कि संगारेड्डी में उसे जान का खतरा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी चाहे तो वकील के माध्यम से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हो सकता है। यदि व्यक्तिगत उपस्थिति जरूरी हो, तो वह मजिस्ट्रेट से सुरक्षा की मांग कर सकता है, जिस पर उचित विचार किया जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का ट्रांसफर आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि:

• मामला तुरंत वापस संगारेड्डी की अदालत में भेजा जाए।

• यदि ट्रांसफर के बाद केस किसी कारण से बंद हुआ हो, तो उसे बहाल कर फिर से संगारेड्डी भेजा जाए।

• अदालत की यह टिप्पणी केवल ट्रांसफर मुद्दे तक सीमित होगी, मामले के गुण-दोष पर नहीं।

अदालत ने आदेश दिया कि पक्षकार 16 फरवरी 2026 को संगारेड्डी की अदालत में पेश हों, व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से।

Case Title: Prasanna Kasini vs State of Telangana & Anr.

Case No.: Crl. A. @ SLP (Crl.) No.7038 of 2025

Case Type: Criminal Appeal

Decision Date: 06 January 2026

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