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सुप्रीम कोर्ट ने किरायेदार की बेदखली रोकने की आखिरी कोशिश को खारिज करते हुए ₹5 लाख का जुर्माना भरने का आदेश दिया।

Vivek G.
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सुप्रीम कोर्ट ने किरायेदार की याचिका खारिज कर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और कहा कि बार-बार याचिका दाखिल करना कानून का दुरुपयोग है। - राजेश गोयल बनाम मेसर्स लक्ष्मी कंस्ट्रक्शंस और अन्य।

सुप्रीम कोर्ट ने किरायेदार की बेदखली रोकने की आखिरी कोशिश को खारिज करते हुए ₹5 लाख का जुर्माना भरने का आदेश दिया।

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक लंबे समय से चल रहे मकान विवाद में किरायेदार की नई याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि बार-बार एक ही मुद्दे को अलग-अलग तरीके से उठाना “कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग” है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद सहारनपुर स्थित एक संपत्ति को लेकर था, जहां मकान मालिक और किरायेदार के बीच संबंध पहले ही कई स्तरों पर तय हो चुका था।

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) ने 2022 में किरायेदार को 30 दिन में मकान खाली करने का आदेश दिया था। इसके बाद जिला न्यायाधीश, इलाहाबाद हाई कोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।

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सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही किरायेदार को 31 मार्च 2025 तक मकान खाली करने का समय दिया था। इसके बावजूद किरायेदार ने पुनर्विचार, संशोधन और अन्य आवेदन दायर किए, जिन्हें लगातार खारिज किया गया।

मामला तब जटिल हुआ जब किरायेदार ने फिर से रेंट अथॉरिटी के सामने बहाली (restoration) की अर्जी दायर की।

रेंट अथॉरिटी ने 15 मई 2025 को इस अर्जी को स्वीकार कर लिया, जिससे पहले से तय निष्कर्षों पर सवाल खड़ा हो गया।

इसके खिलाफ मकान मालिक हाई कोर्ट गया, जहां इस आदेश को रद्द कर दिया गया। इसके बाद किरायेदार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:

“यह याचिका न्यायालय के आदेशों को दरकिनार करने और कानून की प्रक्रिया का खुला दुरुपयोग है।”

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि:

• मकान मालिक और किरायेदार का संबंध पहले ही अंतिम रूप से स्थापित हो चुका है।

• रेंट अथॉरिटी के पास स्वामित्व (title) तय करने का अधिकार नहीं है।

• ऐसे में बहाली का आदेश देना अधिकार क्षेत्र से बाहर था।

कोर्ट ने कहा,

“जब उच्च न्यायालय और यह न्यायालय पहले ही निर्णय दे चुके हों, तो कोई अधीनस्थ प्राधिकारी उस आधार को निष्प्रभावी नहीं कर सकता।”

सुनवाई में यह भी सामने आया कि अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने एक रिपोर्ट में संपत्ति के दस्तावेजों पर सवाल उठाए थे और उसी आधार पर बाद में बहाली आदेश पारित कर दिया।

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कोर्ट ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि एक ही अधिकारी अलग-अलग भूमिकाओं में ऐसा नहीं कर सकता।

हालांकि, संबंधित अधिकारी ने बिना शर्त माफी मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने:

• किरायेदार की याचिका सुनने से इनकार कर दिया

• 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जो सुप्रीम कोर्ट मिडिल इनकम ग्रुप लीगल एड सोसाइटी में जमा होगा

• रेंट अथॉरिटी के बहाली आदेश को “अमान्य” (void) घोषित किया

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला न्यायिक अनुशासन के सिद्धांतों का पालन न करने का उदाहरण है।

Case Details

Case Title: Rajesh Goyal vs. M/s Laxmi Constructions & Ors.

Case Number: Civil Appeal No. of 2026 (arising out of SLP (C) No. 27184 of 2025)

Judges: Justice Sanjay Karol and Justice Nongmeikapam Kotiswar Singh

Decision Date: March 25, 2026

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