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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: प्रशिक्षण अवधि भी सेवा का हिस्सा, सहायक अभियंताओं की वरिष्ठता पहली नियुक्ति से गिनी जाएगी

Vivek G.
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एम. थानिगिवेलु एवं अन्य बनाम तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड एवं अन्य, सुप्रीम कोर्ट ने कहा प्रशिक्षण भी सेवा का हिस्सा है। तमिलनाडु बिजली बोर्ड में सहायक अभियंताओं की वरिष्ठता पहली नियुक्ति की तारीख से गिनी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: प्रशिक्षण अवधि भी सेवा का हिस्सा, सहायक अभियंताओं की वरिष्ठता पहली नियुक्ति से गिनी जाएगी

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु बिजली बोर्ड में सहायक अभियंताओं (Assistant Engineers) की वरिष्ठता को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण (training) अवधि भी सेवा का हिस्सा मानी जाएगी और सीधे भर्ती हुए अभियंताओं की वरिष्ठता उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से ही गिनी जाएगी।

इस फैसले के साथ ही अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें वरिष्ठता सूची को दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया गया था।

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मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद तमिलनाडु बिजली बोर्ड में सहायक अभियंताओं (Electrical) की नियुक्ति और उनकी आपसी वरिष्ठता से जुड़ा था।

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रिकॉर्ड के अनुसार, बोर्ड ने वर्ष 2000 में सहायक अभियंता के पद पर दो अलग-अलग स्रोतों से भर्ती की प्रक्रिया शुरू की-

• सीधी भर्ती (Direct Recruitment)

• आंतरिक चयन (Internal Selection)

दिसंबर 2000 में 200 अभियंताओं की सीधी भर्ती की गई और मार्च 2001 में 100 और अभियंताओं की नियुक्ति हुई। वहीं आंतरिक चयन के जरिए अभियंताओं की नियुक्ति मई 2002 में की गई।

इसके बाद वरिष्ठता को लेकर विवाद शुरू हुआ। आंतरिक चयन से आए अभियंताओं ने अदालत में याचिका दायर कर कहा कि सीधे भर्ती हुए अभियंताओं की प्रशिक्षण अवधि को वरिष्ठता में नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

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हाईकोर्ट का निर्णय

मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा था कि सीधे भर्ती हुए अभियंताओं की प्रोबेशन अवधि तब शुरू मानी जाएगी जब उनका प्रशिक्षण पूरा होगा।

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि प्रशिक्षण अवधि को देखते हुए दोनों श्रेणियों के अभियंताओं को 2002 में नियुक्त माना जाए और उसी आधार पर वरिष्ठता सूची दोबारा बनाई जाए।

इस फैसले को तमिलनाडु बिजली बोर्ड और सीधे भर्ती हुए अभियंताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु बिजली बोर्ड सेवा विनियमों (Service Regulations) का विस्तृत विश्लेषण करते हुए कहा कि नियमों के अनुसार प्रशिक्षण भी सेवा का हिस्सा है।

पीठ ने कहा:

“नियमों की भाषा स्पष्ट है कि कोई कर्मचारी जब किसी पद के लिए निर्धारित प्रशिक्षण या प्रोबेशन कर रहा होता है, तब भी उसे ड्यूटी पर माना जाएगा।”

अदालत ने यह भी कहा कि नियुक्ति तब मानी जाती है जब कोई व्यक्ति पहली बार उस पद की जिम्मेदारी निभाना शुरू करता है या उस पद के लिए निर्धारित प्रशिक्षण शुरू करता है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठता का निर्धारण उम्मीदवारों की मेरिट सूची में प्राप्त रैंक के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि केवल प्रोबेशन शुरू होने की तारीख से।

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प्रशिक्षण अवधि पर कोर्ट का दृष्टिकोण

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशिक्षण सेवा का हिस्सा है और इसे वरिष्ठता से अलग नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि केवल इस कारण से कि प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को अलग वेतन संरचना मिल रही थी, इससे उनकी सेवा की शुरुआत की तारीख नहीं बदल सकती।

पीठ ने टिप्पणी की कि यदि प्रशिक्षण अवधि को सेवा से अलग कर दिया जाए तो इससे उन कर्मचारियों की सेवा अवधि ही समाप्त मानी जाएगी जिन्होंने पहले नियुक्ति ली थी।

सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीधे भर्ती हुए सहायक अभियंताओं की वरिष्ठता उनकी पहली नियुक्ति और सेवा में शामिल होने की तारीख से ही मानी जाएगी, चाहे वे उस समय प्रशिक्षण में ही क्यों न हों।

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अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के फैसले को गलत ठहराते हुए उसे रद्द कर दिया और कहा कि प्रोबेशन शुरू होने की तारीख को वरिष्ठता का आधार नहीं बनाया जा सकता।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी अपीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया।

Case Title: M. Thanigivelu & Ors. v. Tamil Nadu Electricity Board & Ors.

Case No.: Civil Appeal No. 862 of 2026 (with connected appeals)

Decision Date: 11 March 2026

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