Logo

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कोयला ब्लॉक रद्द होने को ‘कानून में बदलाव’ माना, मुआवज़ा बरकरार

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड बनाम आधुनिक पावर एंड नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड एवं अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक रद्दीकरण को ‘कानून में बदलाव’ माना, बिजली कंपनी को 2014 से मुआवज़ा बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कोयला ब्लॉक रद्द होने को ‘कानून में बदलाव’ माना, मुआवज़ा बरकरार

नई दिल्ली में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बिजली क्षेत्र से जुड़े एक अहम विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। मामला पश्चिम बंगाल की सरकारी बिजली वितरण कंपनी और निजी बिजली उत्पादक कंपनी के बीच कोयले की आपूर्ति व उसके खर्च को लेकर था। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोयला ब्लॉक रद्द होने की घटना “कानून में बदलाव” (Change in Law) मानी जाएगी, लेकिन कुछ अन्य दावों को खारिज कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद की जड़ 2011 के उस समझौते में है, जिसके तहत West Bengal State Electricity Distribution Company Ltd. (WBSEDCL) को 25 वर्षों तक 100 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जानी थी। यह आपूर्ति Adhunik Power & Natural Resources Ltd. (APNRL) द्वारा की जानी थी, जबकि बीच में बिजली व्यापार कंपनी PTC India Limited शामिल थी।

Read also:-40 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में दोषियों को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

समझौते के समय यह दर्ज किया गया था कि APNRL झारखंड के गणेशपुर में स्थित एक कैप्टिव (स्वयं के उपयोग के लिए आवंटित) कोयला ब्लॉक से कोयला लेगी। लेकिन बाद में वह ब्लॉक चालू नहीं हो सका और कंपनी को वैकल्पिक स्रोतों-जैसे ई-नीलामी और आयात-से महंगा कोयला खरीदना पड़ा।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

कोयला ब्लॉक रद्द और नया कानून

25 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने Manohar Lal Sharma v. Principal Secretary मामले में कई कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द कर दिया। इसमें गणेशपुर ब्लॉक भी शामिल था। इसके बाद केंद्र सरकार ने Coal Mines (Special Provisions) Act, 2015 लागू किया, जिससे कोयला ब्लॉकों के आवंटन की प्रक्रिया बदल गई।

APNRL का तर्क था कि यह घटनाएं “कानून में बदलाव” की श्रेणी में आती हैं, इसलिए उसे बढ़ी हुई लागत का मुआवज़ा मिलना चाहिए।

आयोग और अपीलीय ट्रिब्यूनल का रुख

पहले यह विवाद केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) के पास गया। आयोग ने सीमित राहत दी। इसके बाद मामला Appellate Tribunal for Electricity (APTEL) पहुंचा। ट्रिब्यूनल ने माना कि कोयला ब्लॉक रद्द होना और नया कानून लागू होना “Change in Law” है और कंपनी को 25 अगस्त 2014 से मुआवज़ा मिलना चाहिए।

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा था कि ब्लॉक चालू न होने की अवधि में वैकल्पिक कोयला खरीदने पर भी कंपनी को राहत मिलेगी।

Read also:-रूह अफजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी में 12.5% नहीं, 4% VAT लगेगा फल पेय के रूप में

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने समझौते की शर्तों और दोनों पक्षों के पत्राचार पर विस्तार से चर्चा की। न्यायालय ने कहा कि भले ही समझौते में गणेशपुर ब्लॉक का नाम सीधे न लिखा हो, लेकिन बैठक के मिनट्स और बाद के पत्रों से साफ है कि वही “कैप्टिव स्रोत” था।

पीठ ने कहा, “जब किसी अनुबंध की शर्तें आसपास की परिस्थितियों से स्पष्ट होती हों, तो उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोयला ब्लॉक रद्द करने वाला 2014 का फैसला और 2015 का नया कानून, दोनों मिलकर “कानून में बदलाव” की श्रेणी में आते हैं। निर्णय में कहा गया, “यह बदलाव कंपनी के कोयला प्राप्त करने के अधिकार को सीधे प्रभावित करता है, इसलिए मुआवज़ा उचित है।”

अंतिम निर्णय

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने APTEL के आदेश को आंशिक रूप से बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि 25 अगस्त 2014 से, यानी कोयला ब्लॉक रद्द होने की तारीख से, कंपनी को “Change in Law” के आधार पर मुआवज़ा मिलेगा और उस पर ब्याज (carrying cost) भी दिया जाएगा।

Read also:-40 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में दोषियों को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

लेकिन अदालत ने यह राहत रद्द कर दी कि ब्लॉक चालू न होने की शुरुआती अवधि में, जब तक रद्दीकरण नहीं हुआ था, वैकल्पिक कोयला खरीदने का अतिरिक्त खर्च भी दिया जाए। इस हिस्से में APTEL का आदेश निरस्त कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने CERC को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर अपने आदेश में आवश्यक संशोधन करे। लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया।

Case Title: West Bengal State Electricity Distribution Co. Ltd. v. Adhunik Power & Natural Resources Ltd. & Ors.

Case No.: Civil Appeal Nos. 2584–2585 of 2026

Decision Date: 27 February 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates