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रूह अफजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी में 12.5% नहीं, 4% VAT लगेगा फल पेय के रूप में

Vivek G.
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मेसर्स हमदर्द (वक्फ) लैबोरेटरीज बनाम आयुक्त, वाणिज्य कर, उ.प्र. सुप्रीम कोर्ट ने रूह अफजा को यूपी में 4% VAT योग्य फल पेय माना, 12.5% टैक्स आदेश रद्द। पढ़ें पूरा फैसला और कानूनी आधार।

रूह अफजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी में 12.5% नहीं, 4% VAT लगेगा फल पेय के रूप में

दिल्ली की ठंडी सुबह में जब अदालत कक्ष में सुनवाई शुरू हुई, तो सवाल सिर्फ टैक्स दर का नहीं था। मुद्दा यह था कि दशकों से घर-घर में इस्तेमाल होने वाला “रूह अफजा” आखिर कानूनी तौर पर क्या है-सिर्फ शरबत या फल पेय?

सुप्रीम कोर्ट ने इस लंबे विवाद पर अंतिम मुहर लगाते हुए कहा कि “शरबत रूह अफजा” को उत्तर प्रदेश में 12.5% नहीं, बल्कि 4% VAT पर ही टैक्स किया जाएगा।

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पृष्ठभूमि: विवाद की शुरुआत कैसे हुई

मामला 2008 से 2012 के बीच का है। कंपनी Hamdard (Wakf) Laboratories अपने उत्पाद “Sharbat Rooh Afza” पर 4% VAT दे रही थी। उसका दावा था कि यह “फ्रूट ड्रिंक” यानी फल पेय है, जो यूपी वैट कानून की अनुसूची-II के Entry 103 के अंतर्गत आता है।

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लेकिन उत्तर प्रदेश के वाणिज्य कर विभाग ने इसे “अनक्लासिफाइड” वस्तु मानते हुए 12.5% टैक्स लगाया। विभाग का कहना था कि इसमें केवल 10% फल रस है, जबकि खाद्य नियमों के तहत “फ्रूट ड्रिंक” कहलाने के लिए 25% फल रस जरूरी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी विभाग का पक्ष सही माना। इसके बाद कंपनी सुप्रीम कोर्ट पहुंची।

कंपनी की दलील: असली पहचान क्या है?

कंपनी की ओर से कहा गया कि रूह अफजा में अनानास और संतरे का रस है। भले ही चीनी की मात्रा अधिक हो, लेकिन उत्पाद की असली पहचान उसके फल आधारित स्वाद और सुगंध से बनती है।

वकील ने दलील दी, “केवल लाइसेंस या लेबल के आधार पर टैक्स वर्गीकरण तय नहीं किया जा सकता। असली सवाल यह है कि आम उपभोक्ता इसे किस रूप में समझता है।”

कंपनी ने यह भी बताया कि दिल्ली, गुजरात, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसी उत्पाद पर 4% या 5% VAT लगाया गया है।

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विभाग की दलील: ‘नॉन-फ्रूट’ लेबल का असर

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि फूड प्रोडक्ट्स ऑर्डर के तहत यदि किसी पेय में 25% से कम फल रस है, तो उसे “नॉन-फ्रूट” के रूप में ही बेचना होगा। रूह अफजा को भी “नॉन-फ्रूट सिरप” लाइसेंस मिला हुआ है।

सरकार का तर्क था कि जब कानूनन इसे फल उत्पाद नहीं कहा जा सकता, तो टैक्स में इसे “फ्रूट ड्रिंक” कैसे माना जाए?

कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने विस्तार से दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अदालत ने कहा कि टैक्स कानून की व्याख्या उसके अपने शब्दों में की जानी चाहिए, न कि केवल खाद्य नियमों के आधार पर।

पीठ ने कहा,

“यदि कोई वस्तु विशेष एंट्री में उचित रूप से आ सकती है, तो उसे रेसिड्यूअरी एंट्री में नहीं डाला जा सकता।”

कोर्ट ने “कॉमन पार्लेंस टेस्ट” यानी आम व्यापारिक समझ का सिद्धांत लागू किया। अदालत ने माना कि रूह अफजा एक ऐसा पेय है जिसे पानी में मिलाकर फल आधारित शरबत के रूप में पिया जाता है।

निर्णय में कहा गया कि सिर्फ इसलिए कि चीनी की मात्रा 80% है, उत्पाद की पहचान नहीं बदल जाती। फल रस और उससे मिलने वाला स्वाद ही इसकी “एसेंशियल कैरेक्टर” यानी मूल पहचान तय करता है।

अन्य राज्यों में टैक्स दर

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि कई अन्य राज्यों में समान शब्दों वाली वैट एंट्री के तहत रूह अफजा को फल पेय मानकर कम दर पर टैक्स लगाया गया है।

अदालत ने माना कि भले ही एक राज्य दूसरे के फैसले से बाध्य नहीं है, लेकिन इससे यह साबित होता है कि कंपनी की व्याख्या “असंभव या बनावटी” नहीं है।

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अंतिम फैसला

अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “Sharbat Rooh Afza” को यूपी वैट कानून की Entry 103 के तहत “फ्रूट ड्रिंक / प्रोसेस्ड फ्रूट प्रोडक्ट” माना जाएगा।

कोर्ट ने 12.5% VAT लगाने वाले आदेशों को रद्द कर दिया और 4% की दर से टैक्स लगाने का निर्देश दिया। साथ ही, अधिक वसूले गए टैक्स की वापसी या समायोजन का आदेश भी दिया गया।

Case Title: M/s Hamdard (Wakf) Laboratories v. Commissioner, Commercial Tax, U.P.

Case No.: Civil Appeal Nos. 2557–2578 of 2026 & 2579 of 2026

Decision Date: 25 February 2026

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