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ओवरटाइम वेतन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: HRA, TA समेत सभी भत्ते जुड़ेंगे, केंद्र की अपील खारिज

Vivek G.
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यूनियन ऑफ इंडिया बनाम हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री एम्प्लॉइज यूनियन, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि फैक्ट्री एक्ट, 1948 के तहत ओवरटाइम मजदूरी की गणना करते समय HRA, TA और अन्य भत्तों को शामिल किया जाना चाहिए।

ओवरटाइम वेतन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: HRA, TA समेत सभी भत्ते जुड़ेंगे, केंद्र की अपील खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने ओवरटाइम वेतन को लेकर एक अहम और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि फैक्ट्री कर्मचारियों को ओवरटाइम का भुगतान करते समय केवल बेसिक वेतन ही नहीं, बल्कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) और अन्य भत्तों को भी शामिल किया जाएगा। केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा संदेश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली फैक्ट्रियों के कर्मचारियों से जुड़ा है। यूनियन ऑफ इंडिया ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि ओवरटाइम वेतन की गणना करते समय ‘साधारण वेतन’ में भत्ते भी शामिल होंगे।

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सरकार का तर्क था कि ओवरटाइम सिर्फ बेसिक पे और डीए पर दिया जाना चाहिए, जबकि HRA, TA, क्लोदिंग अलाउंस और स्मॉल फैमिली अलाउंस जैसे भत्ते “प्रतिपूरक” (compensatory) हैं, इसलिए इन्हें बाहर रखा जाए।

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वहीं, कर्मचारी यूनियनों ने कहा कि फैक्ट्री एक्ट, 1948 की धारा 59(2) के तहत जो भी वेतन कर्मचारी को मिलता है, वह ओवरटाइम की गणना में जोड़ा जाना चाहिए।

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैक्ट्री एक्ट की व्याख्या करते हुए साफ शब्दों में कहा कि:

“कानून में जिन चीज़ों को बाहर रखा गया है, उनके अलावा किसी भी भत्ते को बाहर नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने कहा कि धारा 59(2) में सिर्फ दो चीज़ें बाहर की गई हैं -

1. बोनस

2. ओवरटाइम का वेतन

इसके अलावा कोई भी भत्ता अपने-आप बाहर नहीं हो सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि मंत्रालयों द्वारा जारी किए गए ऑफिस मेमोरेंडम कानून से ऊपर नहीं हो सकते। न्यायालय के शब्दों में:

“कार्यपालिका किसी सर्कुलर के जरिए संसद के बनाए कानून को नहीं बदल सकती।”

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सरकार की दलील क्यों नहीं मानी गई?

केंद्र सरकार ने दलील दी कि अलग-अलग कर्मचारियों को अलग सुविधाएं मिलती हैं - कोई सरकारी क्वार्टर में रहता है, कोई HRA लेता है, कोई बस सुविधा लेता है - ऐसे में सभी को समान ओवरटाइम देना व्यावहारिक नहीं है।

लेकिन कोर्ट ने यह तर्क खारिज करते हुए कहा कि

• कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है

• मंत्रालयों को यह अधिकार नहीं है कि वे कानून की व्याख्या अपने हिसाब से करें

• फैक्ट्री एक्ट एक कल्याणकारी कानून है, जिसे कर्मचारियों के पक्ष में पढ़ा जाना चाहिए

महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु

अदालत ने साफ किया कि-

• फैक्ट्री एक्ट के तहत नियम बनाने की शक्ति राज्य सरकारों को है

• केंद्र सरकार केवल दिशा-निर्देश दे सकती है, कानून नहीं बदल सकती

• ओवरटाइम का उद्देश्य कर्मचारियों को अतिरिक्त काम के लिए उचित मुआवजा देना है

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि भत्तों को बाहर किया गया, तो यह मजदूरों के शोषण को बढ़ावा देगा।

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अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की सभी अपीलें खारिज कर दीं।

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा गया कि:

• ओवरटाइम वेतन की गणना में HRA, TA और अन्य भत्ते शामिल होंगे

• मंत्रालयों के सर्कुलर कानून से ऊपर नहीं हो सकते

• कर्मचारियों को पूरा वैधानिक लाभ मिलेगा

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले में किसी तरह का हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है।

Case Title: Union of India vs Heavy Vehicles Factory Employees’ Union

Case No.: Civil Appeal Nos. 5185–5192 of 2016

Decision Date: 20 January 2026

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