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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सोलर प्रोजेक्ट में देरी पर NTPC को मुआवजा, हाईकोर्ट का आदेश बहाल

Vivek G.
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मेसर्स साईसुधीर एनर्जी लिमिटेड बनाम एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड। सुप्रीम कोर्ट ने सोलर प्रोजेक्ट में देरी पर NTPC को मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा। सैसुधीर एनर्जी की अपील खारिज।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सोलर प्रोजेक्ट में देरी पर NTPC को मुआवजा, हाईकोर्ट का आदेश बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने सोलर पावर परियोजना में देरी से जुड़े एक अहम विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए M/s Saisudhir Energy Ltd. की अपील खारिज कर दी है और NTPC Vidyut Vyapar Nigam Limited (NVVNL) के पक्ष में दिल्ली हाईकोर्ट के सिंगल जज का आदेश बहाल कर दिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब अनुबंध में पहले से तय मुआवज़ा (Liquidated Damages) मौजूद हो, तो देरी की स्थिति में उसका भुगतान किया जाना वैध है।

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मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2012 का है, जब NTPC Vidyut Vyapar Nigam Limited ने Saisudhir Energy Limited के साथ 20 मेगावाट सोलर बिजली की आपूर्ति के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) किया था।

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यह परियोजना केंद्र सरकार की जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (JNNSM) के तहत थी।

समझौते के अनुसार:

• 26 फरवरी 2013 तक पूरी बिजली आपूर्ति शुरू होनी थी

• देरी होने पर Clause 4.6 के तहत हर्जाना तय था

लेकिन सैसुधीर:

• 10 MW बिजली दो महीने की देरी से

• शेष 10 MW करीब पाँच महीने बाद

शुरू कर पाया।

विवाद कैसे बढ़ा

देरी के बाद NTPC ने बैंक गारंटी भुनाने और हर्जाना वसूलने की कार्रवाई की।

मामला मध्यस्थता (Arbitration) में गया:

• Arbitral Tribunal (बहुमत): ₹1.2 करोड़ हर्जाना

• दिल्ली हाईकोर्ट (Single Judge): ₹27.06 करोड़

• डिवीजन बेंच: घटाकर ₹20.70 करोड़

• सुप्रीम कोर्ट: सिंगल जज का आदेश बहाल

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कोर्ट की अहम टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट की पीठ (न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंद्रकांत) ने कहा-

“यह परियोजना केवल व्यावसायिक नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित और हरित ऊर्जा से जुड़ी थी। ऐसे मामलों में देरी स्वयं नुकसान मानी जाती है।”

कोर्ट ने साफ किया कि:

• NTPC को वास्तविक नुकसान साबित करना ज़रूरी नहीं

• अनुबंध में तय ‘Liquidated Damages’ वैध हैं

• सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाओं में समय-सीमा बेहद महत्वपूर्ण है

कोर्ट का अहम निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि:

• सैसुधीर ने समय-सीमा का उल्लंघन किया

• PPA की शर्तें स्पष्ट थीं

• हाईकोर्ट का सिंगल जज सही था

• डिवीजन बेंच को राशि घटाने का अधिकार नहीं था

“Section 37 के तहत अदालत दोबारा गणना नहीं कर सकती,” कोर्ट ने स्पष्ट किया।

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अंतिम फैसला

• सैसुधीर एनर्जी की अपील खारिज

• NTPC की अपील मंजूर

• ₹27.06 करोड़ का मुआवजा बहाल

• दिल्ली हाईकोर्ट के सिंगल जज का आदेश कायम

मामले का यहीं निपटारा कर दिया गया।

Case Title: Saisudhir Energy Ltd. vs NTPC Vidyut Vyapar Nigam Ltd.

Case No.: Civil Appeal Nos. 12892–12895 of 2024

Decision Date: 30 January 2026

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