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बेलडांगा हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: 'हर भावुक उग्र आर्थिक सुरक्षा पर हमला नहीं'

Vivek G.
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पश्चिम बंगाल राज्य बनाम भारत संघ एवं अन्य। बेलडांगा हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NIA से UAPA लगाने पर सवाल उठाए। केस हाईकोर्ट को वापस भेजा गया।

बेलडांगा हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: 'हर भावुक उग्र आर्थिक सुरक्षा पर हमला नहीं'

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को पश्चिम बंगाल के बेलडांगा हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान माहौल असामान्य रूप से तीखा रहा। अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से पूछा कि बिना राज्य सरकार की केस डायरी देखे उसने कैसे मान लिया कि यह मामला देश की “आर्थिक सुरक्षा” को प्रभावित करता है और इसलिए आतंकवाद निरोधी कानून के तहत आता है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने साफ शब्दों में कहा, “हर भावनात्मक उबाल को आर्थिक सुरक्षा पर खतरा बताकर पैकेज नहीं किया जा सकता।”

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मामले की पृष्ठभूमि

जनवरी में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हिंसा उस वक्त भड़की जब झारखंड में कथित हत्या के बाद 30 वर्षीय अलाउद्दीन शेख का शव उनके गांव लाया गया। विरोध-प्रदर्शन हुए, राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया गया और एक पत्रकार पर हमला भी हुआ। पुलिस ने चार एफआईआर दर्ज कर करीब 30 लोगों को गिरफ्तार किया।

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20 जनवरी को Calcutta High Court ने राज्य को केंद्रीय सशस्त्र बलों के इस्तेमाल का निर्देश दिया और कहा कि केंद्र सरकार चाहे तो NIA जांच पर विचार कर सकती है। इसके बाद National Investigation Agency ने मामला अपने हाथ में ले लिया।

पश्चिम बंगाल सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उसका तर्क था कि हिंसा को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 यानी UAPA के तहत आतंकवादी कृत्य बताना गलत है।

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कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने NIA के वकील से पूछा, “केस डायरी आपके सामने नहीं थी, फिर आपने कैसे तय कर लिया कि धारा 15 UAPA लागू होती है? यह तो पहले से तय किया गया निष्कर्ष लगता है।”

उन्होंने आगे कहा, “बिना दस्तावेज देखे यह कहना कि आर्थिक सुरक्षा खतरे में थी, गंभीर बात है।”

पीठ ने यह भी याद दिलाया कि अप्रैल 2025 में भी इसी इलाके में हिंसा हुई थी और तब हाईकोर्ट ने NIA को जांच की छूट दी थी। “उस समय एजेंसी सोती रही,” न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे कि UAPA लागू नहीं हो सकता, लेकिन इसका आधार स्पष्ट होना चाहिए।”

NIA का पक्ष

NIA की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि इलाका बांग्लादेश सीमा के पास है और हथियारों का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने कहा, “यह एक संवेदनशील क्षेत्र है। हम स्वतंत्र जांच कर रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार केस के कागज हमें नहीं दे रही।”

राजू ने अदालत से राज्य को दस्तावेज सौंपने का निर्देश देने की मांग की।

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राज्य सरकार की आपत्ति

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि इस मामले में न तो विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ और न ही आर्थिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की कोई मंशा थी।

उन्होंने आरोप लगाया, “सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही NIA इतनी सक्रिय क्यों है?”

इस पर एएसजी राजू ने जवाब दिया, “जो वहां हो रहा है, वह सबको पता है।”

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

लंबी बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वापस कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि NIA अपनी जांच की स्थिति पर एक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट को सौंपे, जिसमें यह बताया जाए कि आगे जांच के लिए प्रथम दृष्टया (prima facie) आधार है या नहीं।

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पीठ ने स्पष्ट किया, “हमने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हाईकोर्ट स्वतंत्र रूप से NIA की रिपोर्ट पर विचार करे और उचित आदेश दे।”

साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि राज्य सरकार की याचिका हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ सुने।

सुनवाई यहीं समाप्त हुई, और अब निगाहें फिर से कलकत्ता हाईकोर्ट पर टिक गई हैं।

Case Title: State of West Bengal vs Union of India & Anr.

Case No.: Writ Petition (Civil) – Number Not Disclosed

Decision Date: February 11, 2026

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