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सर्जरी के बाद मरीज की मौत मामले में डॉक्टर के खिलाफ घोर लापरवाही साबित नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक केस रद्द किया

CB News Desk
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सुप्रीम कोर्ट ने केरल की एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर के खिलाफ मेडिकल लापरवाही का आपराधिक मामला रद्द करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर गंभीर आपराधिक लापरवाही साबित नहीं होती। - सुप्रिया कुमारी एम.सी. बनाम केरल राज्य और अन्य।

सर्जरी के बाद मरीज की मौत मामले में डॉक्टर के खिलाफ घोर लापरवाही साबित नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक केस रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने केरल की एक वरिष्ठ एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। मामला 2002 में कन्नूर के एक अस्पताल में हुई सर्जरी के बाद मरीज की मौत से जुड़ा था। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सामग्री नहीं है जिससे डॉक्टर के खिलाफ “गंभीर आपराधिक लापरवाही” साबित हो सके।

जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने 25 मई 2026 को यह फैसला सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

रिकॉर्ड के अनुसार, के.पी. मुरलीधर नामक मरीज को मई 2002 में बवासीर की सर्जरी के लिए कन्नूर के धनलक्ष्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सर्जरी के बाद मरीज को दर्द कम करने के लिए एक इंजेक्शन दिया गया। आरोप था कि इंजेक्शन सही तरीके से नहीं दिया गया, जिसके बाद मरीज की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण “एक्यूट कोरोनरी इंसफिशिएंसी” बताया गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मरीज की हृदय धमनी में 80 प्रतिशत ब्लॉकेज था।

शुरुआत में दर्ज एफआईआर में केवल सर्जन का नाम था। बाद में आगे की जांच के बाद एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर, सर्जन और नर्स के खिलाफ आईपीसी की धारा 304-A के तहत मामला दर्ज किया गया। डॉक्टर सुप्रिया कुमारी ने कई बार कार्यवाही रद्द करने की मांग की, लेकिन केरल हाईकोर्ट ने 2024 में राहत देने से इनकार कर दिया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने नर्स के बयानों पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि नर्स ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग बयान दिए कि इंजेक्शन देने का निर्देश किसने दिया था।

पीठ ने कहा, “बयानों में गंभीर विरोधाभास हैं और उनके आधार पर अपीलकर्ता के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला नहीं बनता।”

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि डॉक्टर की ड्यूटी शाम 5 बजे खत्म हो चुकी थी और वह मरीज को स्थिर हालत में छोड़कर अस्पताल से जा चुकी थीं। बाद में जब मरीज की हालत बिगड़ी, तब अस्पताल में अन्य डॉक्टर और एक ऑन-ड्यूटी एनेस्थेटिस्ट मौजूद थे।

अदालत ने कहा कि फोन पर दर्द कम करने वाली दवा बताना सामान्य चिकित्सा सलाह थी और इसे आपराधिक लापरवाही नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने 2017 में अस्पताल को जिम्मेदार माना था, लेकिन डॉक्टर सुप्रिया कुमारी को किसी भी तरह की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया था। मृतक के परिवार ने भी इस निष्कर्ष को चुनौती नहीं दी थी और केवल मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की थी।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे में समान आरोपों पर आपराधिक मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए कन्नूर की ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी।

पीठ ने आदेश में कहा, “अपीलकर्ता के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की जाती है और उन्हें आरोपों से मुक्त किया जाता है।”

Case Details:

Case Title: Supriya Kumari M.C. v. State of Kerala & Ors.

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 124 of 2025

Judges: Justice Pankaj Mithal and Justice Prasanna B. Varale

Decision Date: May 25, 2026

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