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अमलगमेशन पर टैक्स की गुत्थी: शेयरों की अदला-बदली पर सुप्रीम कोर्ट ने खींची साफ़ लक्ष्मण रेखा

Vivek G.
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मेसर्स जिंदल इक्विपमेंट लीजिंग कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड और अन्य बनाम आयकर आयुक्त, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अमलगमेशन में शेयर मिलने पर टैक्स कब लगेगा? स्टॉक-इन-ट्रेड और वास्तविक आय पर कोर्ट की साफ व्याख्या।

अमलगमेशन पर टैक्स की गुत्थी: शेयरों की अदला-बदली पर सुप्रीम कोर्ट ने खींची साफ़ लक्ष्मण रेखा

शेयर बाजार और कॉरपोरेट टैक्स से जुड़े एक पुराने लेकिन बेहद अहम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और संतुलित फैसला सुनाया है। सवाल सीधा था-कंपनी के विलय (अमलगमेशन) के बाद अगर शेयरों की जगह नए शेयर मिलते हैं, तो क्या उसी वक्त टैक्स लगेगा? अदालत ने इस पर कानून की बारीकियों के साथ व्यावहारिक दृष्टि भी रखी।

यह फैसला Supreme Court of India ने जिंदल समूह की कंपनियों और आयकर विभाग के बीच चले लंबे विवाद में सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद आकलन वर्ष 1997-98 से जुड़ा है। जिंदल समूह की कुछ निवेश कंपनियों के पास जिंदल फेरो एलॉयज़ लिमिटेड (JFAL) के शेयर थे। बाद में अदालत से मंजूर योजना के तहत JFAL का विलय जिंदल स्ट्रिप्स लिमिटेड (JSL) में हो गया।

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विलय योजना के अनुसार, JFAL के हर 100 शेयरों के बदले JSL के 45 शेयर मिले। कंपनियों ने इसे कैपिटल एसेट मानते हुए आयकर अधिनियम की धारा 47(vii) के तहत टैक्स छूट का दावा किया।

लेकिन आयकर विभाग की राय अलग थी। विभाग ने कहा कि ये शेयर स्टॉक-इन-ट्रेड थे, यानी कारोबार के लिए रखे गए थे। ऐसे में नए शेयर मिलने को व्यापारिक लाभ मानते हुए टैक्स लगाया जाना चाहिए।

• आकलन अधिकारी और CIT(A) ने विभाग की दलील मानी और टैक्स लगाया।

• आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने करदाताओं को राहत देते हुए कहा कि जब तक शेयर बेचे नहीं जाते, कोई वास्तविक मुनाफा नहीं होता।

• दिल्ली हाईकोर्ट ने ITAT का आदेश पलटते हुए मामला दोबारा विचार के लिए भेज दिया और कहा कि पहले यह तय होना चाहिए कि शेयर स्टॉक-इन-ट्रेड थे या कैपिटल एसेट।

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान पीठ ने साफ किया कि हर विलय पर अपने-आप टैक्स नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने कहा-

“व्यवसायिक आय तभी मानी जाएगी जब लाभ वास्तविक हो और तुरंत व्यावसायिक रूप से हासिल किया जा सके।”

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयकर कानून की धारा 28 (व्यवसायिक आय) बहुत व्यापक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि काल्पनिक या कागजी लाभ पर टैक्स लगाया जाए।

कोर्ट का विश्लेषण

अदालत ने तीन अहम कसौटियां तय कीं-

1. क्या पुराने शेयर वास्तव में कारोबार की संपत्ति (स्टॉक-इन-ट्रेड) थे?

2. क्या नए मिले शेयरों का मूल्य तुरंत और निश्चित रूप से तय किया जा सकता है?

3. क्या वे शेयर तुरंत बाजार में बेचकर पैसा कमाया जा सकता है?

अगर इन सवालों का जवाब “हाँ” है, तभी इसे व्यापारिक आय माना जा सकता है।

अदालत का अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि-

• केवल विलय के कारण शेयर मिलने से अपने-आप टैक्स नहीं लगेगा।

• टैक्स तभी लगेगा जब यह साबित हो कि शेयर स्टॉक-इन-ट्रेड थे और उनसे तुरंत वास्तविक लाभ हासिल किया जा सकता था।

• यह तथ्यात्मक जांच अब आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण करेगा।

इस तरह, अदालत ने न तो सीधे करदाताओं को छूट दी और न ही विभाग के पक्ष में अंतिम मुहर लगाई, बल्कि संतुलित रास्ता अपनाया।

Case Title: M/s Jindal Equipment Leasing Consultancy Services Ltd. & Ors. vs Commissioner of Income Tax

Case No.: Civil Appeal Nos. 152–155 of 2026

Case Type: Direct Tax – Income Tax

Decision Date: 9 January 2026

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