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कलकत्ता हाईकोर्ट ने एंटी-डंपिंग मामले में विदेशी कंपनी की याचिका खारिज की, क्षेत्राधिकार पर उठे सवाल निर्णायक बने

CB News Desk
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इक्वेट पेट्रोकेमिकल कंपनी के.एस.सी.सी. बनाम डीजीटीआर और अन्य। कलकत्ता हाई कोर्ट ने बिज़नेस पर असर के आधार पर टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन न होने का हवाला देते हुए, DGTR की एंटी-डंपिंग फाइंडिंग्स के खिलाफ विदेशी कंपनी की याचिका खारिज कर दी।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एंटी-डंपिंग मामले में विदेशी कंपनी की याचिका खारिज की, क्षेत्राधिकार पर उठे सवाल निर्णायक बने

कलकत्ता हाईकोर्ट में सोमवार को एक अहम व्यापारिक विवाद की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल संभावित व्यावसायिक नुकसान के आधार पर किसी मामले में क्षेत्रीय अधिकार (territorial jurisdiction) नहीं बनता। न्यायमूर्ति ओम नारायण राय की एकल पीठ ने कुवैत की कंपनी Equate Petrochemical Company K.S.C.C. की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में अदालत के पास सुनवाई का अधिकार ही नहीं है।

यह फैसला डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) द्वारा दिए गए एंटी-डंपिंग के अंतिम निष्कर्षों को चुनौती देने वाली याचिका पर आया।

मामला क्या था

याचिकाकर्ता कंपनी ने DGTR के 23 सितंबर 2025 के उन अंतिम निष्कर्षों को चुनौती दी थी, जिनमें कुवैत, सऊदी अरब और सिंगापुर से आयात होने वाले Mono Ethylene Glycol (MEG) पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की गई थी।

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कंपनी का कहना था कि जांच प्रक्रिया में उसके द्वारा दिए गए आंकड़ों को नज़रअंदाज़ किया गया, लागत और डंपिंग मार्जिन की गणना की पद्धति साझा नहीं की गई और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ।

याचिकाकर्ता की दलीलें

Equate Petrochemical की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे. पी. खेतान ने दलील दी कि यदि केंद्र सरकार DGTR की सिफारिशों को स्वीकार कर लेती है, तो कोलकाता स्थित ग्राहकों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इससे कंपनी का पश्चिम बंगाल में व्यापार प्रभावित होगा और यही कारण है कि कलकत्ता हाईकोर्ट को इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि DGTR ने “आवश्यक तथ्यों” (essential facts) का खुलासा नहीं किया, जो नियमों के तहत अनिवार्य था।

केंद्र सरकार और अन्य प्रतिवादियों ने प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए कहा कि:

• DGTR और संबंधित प्राधिकरण दिल्ली में स्थित हैं।

• जांच, सुनवाई और अंतिम निष्कर्ष की पूरी प्रक्रिया दिल्ली में हुई।

• केवल यह कहना कि कोलकाता में व्यापार पर असर पड़ सकता है, कारण-ए-दावा (cause of action) नहीं बनाता।

प्रतिवादियों ने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि व्यापारिक प्रभाव और वास्तविक कानूनी विवाद के बीच सीधा संबंध होना जरूरी है।

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हाईकोर्ट की टिप्पणी

न्यायमूर्ति ओम नारायण राय ने कहा कि,

“कारण-ए-दावा वही तथ्य होते हैं, जो सीधे विवाद से जुड़े हों और जिनके बिना राहत नहीं दी जा सकती।”

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस याचिका का मूल मुद्दा DGTR की प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के कथित उल्लंघन से जुड़ा है, न कि पश्चिम बंगाल में संभावित व्यापारिक नुकसान से।

पीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता का यह तर्क कि भविष्य में व्यापार प्रभावित हो सकता है, केवल एक आशंका है, जिसे अदालत क्षेत्रीय अधिकार का आधार नहीं मान सकती।

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अदालत का अंतिम फैसला

सभी दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि:

• इस मामले में कोई भी महत्वपूर्ण या अनिवार्य तथ्य ऐसा नहीं है, जिससे यह कहा जा सके कि कारण-ए-दावा का कोई हिस्सा पश्चिम बंगाल में उत्पन्न हुआ।

• इसलिए, कलकत्ता हाईकोर्ट के पास इस याचिका की सुनवाई का क्षेत्रीय अधिकार नहीं है।

अदालत ने याचिका को क्षेत्रीय अधिकार के अभाव में खारिज कर दिया। मामले के गुण-दोष (merits) पर कोई टिप्पणी नहीं की गई और कोई लागत (costs) भी नहीं लगाई गई।

Case Title: Equate Petrochemical Company K.S.C.C. vs DGTR & Ors.

Case No.: WPA 26130 of 2025

Case Type: Writ Petition (Anti-Dumping / Trade Remedies)

Decision Date: 22 December 2025

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