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मद्रास हाईकोर्ट ने सेक्शन 54 पर अहम फैसला सुनाया: जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के बावजूद टैक्स छूट मान्य

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सी. आर्यमा सुंदरम बनाम आयकर आयुक्त, मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के बावजूद समय पर नए मकान में निवेश पर आयकर धारा 54 की छूट मिलेगी।

मद्रास हाईकोर्ट ने सेक्शन 54 पर अहम फैसला सुनाया: जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के बावजूद टैक्स छूट मान्य

चेन्नई में हुई सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने आयकर अधिनियम की धारा 54 से जुड़े एक पुराने लेकिन अहम विवाद पर स्पष्ट रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि यदि करदाता ने समय-सीमा के भीतर नए आवासीय मकान में निवेश किया है, तो केवल इस आधार पर छूट नहीं रोकी जा सकती कि संपत्ति जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) के तहत पहले ध्वस्त हो चुकी थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह अपील सी. आर्यमा सुंदरम बनाम आयकर आयुक्त, चेन्नई से जुड़ी थी। मामला आकलन वर्ष 1999-2000 और 2001-02 का था।

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करदाता के परिवार की चेन्नई स्थित एक आवासीय संपत्ति पर 1994 में डेवलपर्स के साथ जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट हुआ था। इसके बाद 1995 में मकान को तोड़ दिया गया।

बाद के वर्षों में संपत्ति के हिस्सों की बिक्री हुई और करदाता ने इससे हुए दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ पर धारा 54 के तहत छूट का दावा किया, यह कहते हुए कि उसने 30 जनवरी 2001 को नई दिल्ली में एक आवासीय मकान खरीदा था।

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आयकर विभाग ने इस दावे का विरोध किया। विभाग का कहना था कि-

• जिस संपत्ति पर पूंजीगत लाभ हुआ, वह संबंधित वर्षों में “आवासीय मकान” नहीं थी क्योंकि वह पहले ही ध्वस्त हो चुकी थी।

• करदाता ने पूंजीगत लाभ राशि को कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम में जमा नहीं किया, जैसा कि धारा 54(2) में कहा गया है।

• विभाग के अनुसार, ट्रांसफर की तारीख 1994 मानी जानी चाहिए, जब JDA किया गया था।

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अदालत की टिप्पणियां

पीठ ने मामले को “समग्र दृष्टि” से देखने पर जोर दिया। अदालत ने साफ कहा कि जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट अपने आप में संपत्ति का अंतिम ट्रांसफर नहीं होता।

अदालत ने कहा,

“ट्रांसफर की वास्तविक घटना उस समय मानी जाएगी जब बिक्री विलेख निष्पादित हुआ, न कि केवल डेवलपमेंट एग्रीमेंट के समय।”

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 54 में करदाता को दो विकल्प दिए गए हैं-

1. नई आवासीय संपत्ति में समय-सीमा के भीतर निवेश, या

2. कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम में राशि जमा करना।

यदि करदाता ने पहले विकल्प को सही समय पर पूरा कर दिया है, तो दूसरे विकल्प को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के उस निष्कर्ष को गलत माना, जिसमें कहा गया था कि ट्रांसफर 1994 में हो चुका था।

अदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर कहा कि बिक्री 1999 में हुई थी, इसलिए पूंजीगत लाभ उसी वर्ष से संबंधित माना जाएगा।

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करदाता ने वैकल्पिक रूप से धारा 54F के तहत छूट की मांग भी की थी। इस पर अदालत ने कहा कि यह एक स्वतंत्र प्रावधान है और इसके लिए अलग शर्तें पूरी करना जरूरी है।

चूंकि करदाता ने यह दावा निचली अपीलीय कार्यवाही में पूरी तरह से आगे नहीं बढ़ाया था, इसलिए ट्रिब्यूनल द्वारा इसे अस्वीकार करना गलत नहीं माना गया।

अंतिम निर्णय

अदालत ने धारा 54 से जुड़े मुख्य सवालों पर करदाता के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि नई दिल्ली में खरीदी गई आवासीय संपत्ति के कारण करदाता धारा 54 की छूट का हकदार है।

हालांकि, धारा 54F से संबंधित वैकल्पिक दावा स्वीकार नहीं किया गया।

इसी के साथ कुछ अपीलें स्वीकार की गईं और कुछ को खारिज कर दिया गया।

Case Title: C. Aryama Sundaram vs Commissioner of Income Tax

Case No.: TCA Nos. 1161, 1162, 1163 & 1164 of 2009

Case Type: Income Tax Appeal

Decision Date: 17 December 2025

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