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हत्या मामले में आरोपी को मिली राहत बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने से किया इनकार

Vivek G.
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उस्मान अली बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में आरोपी को मिली जमानत रद्द करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा-लंबी हिरासत और दुरुपयोग न होने पर जमानत बरकरार रहेगी।

हत्या मामले में आरोपी को मिली राहत बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में हुए चर्चित हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को मिली जमानत को बरकरार रखा है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला जमानत रद्द करने योग्य नहीं है, क्योंकि आरोपी पहले ही लंबे समय तक जेल में रह चुका है और जमानत का दुरुपयोग करने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।

यह फैसला न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2018 का है। सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र में पंचायत अध्यक्ष की सुबह टहलते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

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एफआईआर में शुरुआत में कुछ अन्य लोगों के नाम दर्ज थे। बाद में जांच के दौरान कश्मीर पासवान नामक आरोपी के बयान और मृतक के कथित मौखिक Dying Declaration के आधार पर रिंकू भारद्वाज उर्फ प्रकाश राजभर को भी आरोपी बनाया गया।

आरोप था कि हत्या साजिश के तहत कराई गई और इसमें प्रतिबंधित हथियारों का इस्तेमाल हुआ। अभियोजन के अनुसार आरोपी लंबे समय तक फरार रहा और बाद में एसटीएफ व एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार हुआ।

हाईकोर्ट का आदेश और चुनौती

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 22 जनवरी 2025 को आरोपी को जमानत दे दी थी।

इस फैसले को मृतक पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

अपील में दलील दी गई कि-

• आरोपी का आपराधिक इतिहास है

• वह प्रभावशाली व्यक्ति है

• गवाहों को खतरा हो सकता है

• हत्या सुनियोजित तरीके से की गई

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कोर्ट की सुनवाई में क्या कहा गया

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि-

• आरोपी का नाम एफआईआर में नहीं था

• उसकी गिरफ्तारी बाद में सह-आरोपी के बयान के आधार पर हुई

• वह करीब 6 साल से अधिक समय तक जेल में रहा

• अब तक 55 गवाहों में से केवल 13 के बयान हुए हैं

• समान भूमिका वाले सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है

अदालत ने कहा,

“जमानत रद्द करना और जमानत देना, दोनों अलग परिस्थितियों में देखे जाते हैं। केवल गंभीर आरोप होना ही जमानत रद्द करने का आधार नहीं बन सकता।”

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि-

“यदि जमानत मिलने के बाद आरोपी ने स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया है और ट्रायल में बाधा नहीं डाली है, तो केवल आशंका के आधार पर जमानत रद्द नहीं की जा सकती।”

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ कोई नया ऐसा तथ्य सामने नहीं आया है, जिससे यह लगे कि वह न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है।

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अदालत का अंतिम फैसला

सभी तथ्यों और कानून के सिद्धांतों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा-

• हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है

• आरोपी लंबे समय से जेल में रहा है

• जमानत का दुरुपयोग नहीं हुआ

• इसलिए हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है

परिणामस्वरूप, अपील खारिज कर दी गई और जमानत बरकरार रखी गई।

Case Title: Usman Ali vs State of Uttar Pradesh & Anr.

Case No.: Criminal Appeal No. 541 of 2026

Decision Date: 30 January 2026

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