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ST कोटे से चयनित IPS अधिकारी की राजस्थान कैडर मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चयन प्रक्रिया को अंतिमता जरूरी

Vivek G.
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रूपेश कुमार मीना बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य, सुप्रीम कोर्ट ने IPS अधिकारी रूपेश कुमार मीणा की राजस्थान कैडर मांग खारिज की, कहा कैडर आवंटन प्रक्रिया में अंतिमता जरूरी।

ST कोटे से चयनित IPS अधिकारी की राजस्थान कैडर मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चयन प्रक्रिया को अंतिमता जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में आईपीएस अधिकारी रूपेश कुमार मीणा की राजस्थान कैडर में स्थानांतरण की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वर्षों बाद कैडर बदलने की अनुमति देने से चयन और कैडर आवंटन की प्रक्रिया कभी स्थिर नहीं रह पाएगी।

यह फैसला 4 फरवरी 2026 को न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने सुनाया।

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मामले की पृष्ठभूमि

रूपेश कुमार मीणा अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से वर्ष 2004 की सिविल सेवा परीक्षा में चयनित हुए थे और उन्हें आईपीएस में तमिलनाडु कैडर आवंटित किया गया था।

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विवाद की शुरुआत तब हुई जब वर्ष 2003 में चयनित एक अन्य अधिकारी ऋषिकेश मीणा ने 2004 की परीक्षा भी पास कर ली थी। उन्हें राजस्थान राज्य में ‘इनसाइडर’ आईपीएस कैडर का विकल्प दिया गया, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।

इसके बाद मेरिट सूची में अगला नाम राजेश कुमार का था। उन्होंने इस कैडर पर दावा किया और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) से राहत भी हासिल कर ली। हालांकि बाद में राजेश कुमार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित हो गए और आईपीएस कैडर में रुचि नहीं दिखाई।

इसी स्थिति के बाद रूपेश कुमार मीणा, जो मेरिट सूची में तीसरे स्थान पर थे, ने दावा किया कि अब यह ‘इनसाइडर’ रिक्ति उन्हें मिलनी चाहिए।

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ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट का रुख

रूपेश कुमार ने 2010 में ट्रिब्यूनल में आवेदन दाखिल किया। उनका तर्क था कि उनसे ऊपर के दोनों उम्मीदवारों ने राजस्थान कैडर स्वीकार नहीं किया, इसलिए यह अवसर उन्हें मिलना चाहिए।

हालांकि ट्रिब्यूनल ने कहा कि कैडर आवंटन में गृह मंत्रालय द्वारा कोई अनियमितता नहीं हुई है। ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि यदि कोई उम्मीदवार पद ग्रहण नहीं करता, तो अगले उम्मीदवार को स्वाभाविक अधिकार नहीं मिलता।

दिल्ली हाई कोर्ट ने भी ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट में पक्षकारों के तर्क

रूपेश कुमार की ओर से दलील दी गई कि यह कैडर बदलने का मामला नहीं बल्कि एक सुधार (Correction) का मुद्दा है। उनके वकील ने कहा कि जब तक पहले दो उम्मीदवारों ने राजस्थान कैडर ज्वाइन नहीं किया, तब तक यह रिक्ति बनी रही और उन्हें उसका लाभ मिलना चाहिए था।

वहीं केंद्र सरकार ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि कैडर आवंटन की प्रक्रिया को वर्षों बाद चुनौती देना व्यवस्था को अस्थिर कर देगा। सरकार ने अदालत को बताया कि यदि इस तरह के दावे स्वीकार किए गए, तो इससे “चेन रिएक्शन” शुरू हो सकता है और कई अधिकारियों के कैडर दोबारा बदलने की मांग उठ सकती है।

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कोर्ट की टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि रूपेश कुमार को 2004 में मेरिट के आधार पर तमिलनाडु कैडर आवंटित किया गया था और वह पिछले दो दशकों से वहीं सेवा दे रहे हैं।

पीठ ने कहा, “कैडर आवंटन की प्रक्रिया को अनिश्चित या लगातार बदलने योग्य नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि इससे पूरी चयन व्यवस्था प्रभावित होगी।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि एक अधिकारी का कैडर बदला जाता है, तो उसके कारण अन्य अधिकारियों द्वारा भी इसी तरह की मांग उठ सकती है, जिससे पूरी प्रणाली अस्थिर हो सकती है।

पीठ ने यह भी नोट किया कि यह साबित करने के लिए कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया कि वर्ष 2004 की वह ‘इनसाइडर’ रिक्ति अब तक खाली रही हो।

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अदालत का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि रूपेश कुमार मीणा मेरिट सूची में उस स्थिति में नहीं थे कि उन्हें सीधे उस रिक्ति का अधिकार मिल सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि छह वर्ष बाद इस तरह का दावा उठाना उचित नहीं है।

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने रूपेश कुमार मीणा की अपील को खारिज कर दिया और ट्रिब्यूनल व हाई कोर्ट के फैसलों को सही ठहराया। साथ ही, लंबित सभी आवेदन भी समाप्त कर दिए गए।

Case Title: Rupesh Kumar Meena vs Union of India & Others

Case No.: Civil Appeal Nos. 11302-11303 of 2016

Decision Date: February 4, 2026

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