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सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट मामले में याचिकाकर्ताओं को दी अग्रिम जमानत, अंतरिम संरक्षण किया पक्का

Vivek G.
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संदीप मिर्धा @ समदेव मिर्धा और अन्य बनाम झारखंड राज्य और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के SC/ST एक्ट मामले में याचिकाकर्ताओं को अग्रिम जमानत दी, अंतरिम संरक्षण को करते हुए पुष्टि।

सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट मामले में याचिकाकर्ताओं को दी अग्रिम जमानत, अंतरिम संरक्षण किया पक्का

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की अदालत संख्या-3 में एक अहम आपराधिक मामले की सुनवाई हुई। अदालत में मौजूद वकीलों की दलीलों और केस की फाइलों के बीच, जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने झारखंड के एक FIR से जुड़े याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अंतरिम संरक्षण को बरकरार रखते हुए अग्रिम जमानत मंजूर कर दी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला झारखंड के दुमका जिले के जरमुंडी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। FIR संख्या 26, दिनांक 19 मार्च 2024 को दर्ज की गई थी। इसमें भारतीय दंड संहिता की धाराएं 341 (रास्ता रोकना), 323 (मारपीट), 504 (जानबूझकर अपमान), 506/34 (आपराधिक धमकी व साझा मंशा) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 2015 की धारा 3(1)(s)(w) लगाई गई थीं।

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इस FIR के खिलाफ संदेव मिर्धा उर्फ समदेव मिर्धा और अन्य ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी।

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कोर्ट में क्या हुआ

5 फरवरी 2026 को जब मामला सुनवाई के लिए लगा, तो याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम ने दलील दी कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और गिरफ्तारी की आशंका के कारण उन्हें संरक्षण की जरूरत है।

गौरतलब है कि इससे पहले 15 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए अंतरिम राहत दी थी और जांच में सहयोग की शर्त पर कोई “कठोर कदम” न उठाने का निर्देश दिया था।

पीठ की टिप्पणी

दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों पर ध्यान दिया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग कर रहे हैं और इस स्तर पर मामले के गुण-दोष पर कोई राय दिए बिना राहत दी जा सकती है।

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पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा, “मामले के तथ्यों और याचिकाकर्ताओं के सहयोग को देखते हुए, अंतरिम संरक्षण की पुष्टि की जाती है और उन्हें अग्रिम जमानत दी जाती है।”

अदालत का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी होती है, तो उन्हें उपयुक्त जमानत बांड और जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाएगा। शर्तें तय करने का अधिकार संबंधित थाना प्रभारी को दिया गया है।

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इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता जब-जब बुलाए जाएं, जांच में शामिल होंगे और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438(2) के तहत सभी शर्तों का पालन करेंगे।

पीठ ने यह चेतावनी भी दी कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो संबंधित अदालत कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।

इन्हीं निर्देशों के साथ विशेष अनुमति याचिका का निपटारा कर दिया गया और लंबित सभी अर्जियां भी समाप्त मानी गईं।

Case Title: Sandev Mirdha @ Samdev Mirdha & Ors. vs State of Jharkhand & Anr.

Case No.: SLP (Crl.) No. 13765 of 2025

Decision Date: 05 February 2026

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