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सुप्रीम कोर्ट ने सुमैया परवीन को बड़ी राहत दी, 33 लाख जमा करने पर घर के कागज़ लौटाने का आदेश

Vivek G.
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सुमैया परवीन बनाम सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, सुप्रीम कोर्ट ने सुमैया परवीन को बड़ी राहत देते हुए 33 लाख जमा करने पर घर के दस्तावेज लौटाने का आदेश दिया। मामला बैंक लोन और OTS से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुमैया परवीन को बड़ी राहत दी, 33 लाख जमा करने पर घर के कागज़ लौटाने का आदेश

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने एक संवेदनशील मामले में मानवीय आधार पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बैंक लोन विवाद में फंसी सुमैया परवीन को राहत देते हुए कहा कि यदि वह तय समय में 33 लाख रुपये जमा कर देती हैं, तो बैंक को उनके दिवंगत पति की संपत्ति के मूल दस्तावेज लौटाने होंगे। यह आदेश कोविड काल में आई पारिवारिक त्रासदी और आर्थिक कठिनाइयों को देखते हुए दिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

सुमैया परवीन के पति चेन्नई के पास स्थित एक चमड़ा कारोबार ‘FILSA Leathers’ चलाते थे। उन्होंने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 50 लाख रुपये का कर्ज लिया था, जिसके बदले अपनी रिहायशी संपत्ति गिरवी रखी गई थी।

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मई 2021 में कोविड की दूसरी लहर के दौरान उनके पति का निधन हो गया। उस समय तक लोन खाता नियमित था। लेकिन मौत के बाद आर्थिक हालात बिगड़ गए और बैंक ने खाते को एनपीए घोषित कर दिया। इसके बाद SARFAESI कानून के तहत कार्रवाई शुरू हुई।

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वन टाइम सेटलमेंट और विवाद

जनवरी 2024 में बैंक ने 71 लाख रुपये के बकाया के बदले 34.69 लाख रुपये में वन टाइम सेटलमेंट (OTS) की पेशकश की। सुमैया परवीन ने 10 प्रतिशत रकम यानी करीब 3.46 लाख रुपये जमा भी कर दिए।

हालांकि, शेष रकम समय पर जमा नहीं हो सकी। बाद में जब उन्होंने दोबारा ओटीएस का लाभ लेने की कोशिश की तो बैंक ने करीब 9 लाख रुपये अतिरिक्त मांग लिए। इसके बाद संपत्ति पर कब्जे की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

इससे परेशान होकर सुमैया ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह मामला असाधारण परिस्थितियों का है। कोर्ट ने माना कि बैंक की मांग कानूनी रूप से सही हो सकती है, लेकिन इससे याचिकाकर्ता को अत्यधिक कठिनाई होगी।

कोर्ट ने कहा कि न्याय के हित में यह उचित होगा कि सुमैया परवीन को सीमित राहत दी जाए।

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अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि सुमैया परवीन आठ सप्ताह के भीतर 33 लाख रुपये जमा कर देती हैं, तो बैंक को:

• आगे का ब्याज रोकना होगा

• संपत्ति के सभी मूल दस्तावेज लौटाने होंगे

• नो-ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करना होगा

हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि तय समय में रकम जमा नहीं हुई, तो बैंक कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल इस मामले तक सीमित रहेगा और इसे मिसाल नहीं माना जाएगा।

Case Title: Sumaiya Parveen vs Central Bank of India

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 29289-29290 of 2024

Decision Date: 16 January 2026

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