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सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना पीड़ित को दी बड़ी राहत, मुआवजा बढ़ाकर 7.14 लाख किया

Vivek G.
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एस. शकुल हमीद बनाम तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम लिमिटेड, सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना पीड़ित को बड़ी राहत देते हुए मुआवजा बढ़ाकर 7.14 लाख रुपये किया, आय और विकलांगता पर अहम टिप्पणी।

सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना पीड़ित को दी बड़ी राहत, मुआवजा बढ़ाकर 7.14 लाख किया

नई दिल्ली की अदालत कक्ष संख्या में मंगलवार को माहौल गंभीर था। Supreme Court of India में जब न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने मोटर दुर्घटना मुआवजा से जुड़ी एक अपील पर फैसला सुनाया, तो पीड़ित पक्ष के चेहरे पर राहत साफ दिखी। अदालत ने निचली अदालत और हाईकोर्ट के आदेशों में हस्तक्षेप करते हुए मुआवजे की रकम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर दी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एस. शकुल हमीद बनाम तमिलनाडु स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड से जुड़ा है। याचिकाकर्ता एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था और उसे स्थायी विकलांगता का सामना करना पड़ा।

दावा अधिकरण (ट्रिब्यूनल) ने शुरुआत में उन्हें ₹2,12,800 का मुआवजा दिया था, जिसे मद्रास हाईकोर्ट ने बढ़ाकर ₹2,23,000 कर दिया। लेकिन याचिकाकर्ता इससे संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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उनका तर्क था कि वह एक सेल्समैन के रूप में काम करते थे और ₹8,000 मासिक कमाई करते थे, जबकि अदालतों ने उनकी आय मात्र ₹3,300 मानकर गणना की।

अदालत में दलीलें

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि दुर्घटना के समय लागू न्यूनतम मजदूरी को आधार बनाया जाना चाहिए था। साथ ही, मेडिकल प्रमाणपत्र में 60% विकलांगता बताई गई थी, जिसे कम कर देना अनुचित है।

वहीं, परिवहन निगम की ओर से कहा गया कि दावा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 163A के तहत किया गया था, जिसमें आय और लापरवाही साबित करना जरूरी नहीं होता। निगम ने यह भी तर्क दिया कि आय या रोजगार का कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया।

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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

पीठ ने रिकॉर्ड देखने के बाद साफ कहा कि भले ही याचिका में धारा 163A का उल्लेख हो, लेकिन पूरे दावे की भाषा और आरोप यह दर्शाते हैं कि मामला धारा 166 के अंतर्गत है, जहां लापरवाही का प्रश्न महत्वपूर्ण होता है।

पीठ ने कहा,

“सिर्फ धारा का उल्लेख निर्णायक नहीं हो सकता, जब याचिका के तथ्यों से स्पष्ट हो कि दावा लापरवाही पर आधारित है।”

आय के सवाल पर अदालत ने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2005 में एक सामान्य मजदूर की आय भी ₹5,000 मानी जा सकती है। इसलिए याचिकाकर्ता की मासिक आय ₹5,000 सुरक्षित रूप से तय की जा सकती है।

विकलांगता को लेकर अदालत ने हाईकोर्ट की टिप्पणी पर नाराजगी जताई और कहा कि बिना अपील के विकलांगता प्रतिशत को 50% से घटाकर 40% करना गलत था।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की उम्र 27 वर्ष मानते हुए 17 का मल्टीप्लायर लागू किया। साथ ही, स्व-रोजगार होने के कारण 40% भविष्य संभावनाएं जोड़ी गईं।

नई गणना के अनुसार,

• आय हानि: ₹5,000 × 12 × 17 × 140% × 50% = ₹7,14,000

अन्य पारंपरिक मदों में ट्रिब्यूनल द्वारा दी गई राशि यथावत रखी गई।

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अंतिम फैसला

अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए परिवहन निगम को निर्देश दिया कि वह तीन महीने के भीतर संशोधित मुआवजा राशि का भुगतान करे। भुगतान पर 7.5% वार्षिक ब्याज भी देय होगा, जैसा कि हाईकोर्ट ने पहले तय किया था।

इसके साथ ही सभी लंबित अर्जियां भी निस्तारित कर दी गईं।

Case Title: S. Shakul Hameed vs Tamil Nadu State Transport Corporation Ltd.

Case No.: CA @ SLP (C) No. 7347 of 2024

Case Type: Motor Accident Compensation

Decision Date: 06 January 2026

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