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सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में सज़ा पर उठाया सवाल, प्रोबेशन पर विचार के लिए नोटिस जारी

Vivek G.
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कपिलदेव मंडल एवं अन्य। बनाम झारखंड राज्य, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हत्या मामले में सज़ा पर सवाल उठाते हुए प्रोबेशन एक्ट पर विचार के लिए नोटिस जारी किया। जानिए पूरा मामला।

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में सज़ा पर उठाया सवाल, प्रोबेशन पर विचार के लिए नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के एक हत्या मामले में सज़ा के सवाल पर अहम टिप्पणी करते हुए नोटिस जारी किया है। मामला दो अभियुक्तों - कपिलदेव मंडल और दिलीप मंडल - से जुड़ा है, जिन्हें निचली अदालत ने हत्या का दोषी ठहराया था। बाद में हाईकोर्ट ने सज़ा में बदलाव किया, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उसमें भी एक कानूनी खामी की ओर ध्यान दिलाया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए उम्रकैद के आदेश को आंशिक रूप से बदला गया था।

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ट्रायल कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी मानते हुए उम्रकैद और जुर्माने की सज़ा सुनाई थी।

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इसके बाद अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा करते हुए माना कि यह मामला हत्या का नहीं बल्कि गैर-इरादतन हत्या का है। कोर्ट ने सज़ा को घटाकर IPC की धारा 304 पार्ट-II के तहत 5 साल के कठोर कारावास में बदल दिया।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सोमवार को न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट ने जब भारतीय दंड संहिता की धारा 300 के अपवाद-4 को लागू किया, तो सज़ा तय करते समय एक अहम पहलू पर ध्यान नहीं दिया गया।

पीठ ने टिप्पणी की,“यदि मामला धारा 300 के अपवाद-4 में आता है, तो सज़ा धारा 304 पार्ट-I के अंतर्गत होनी चाहिए थी, न कि पार्ट-II के तहत।”

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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी है, इसलिए अदालत सीमित दायरे में ही विचार कर रही है।

कम उम्र के अभियुक्त पर विशेष विचार

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अभियुक्त कपिलदेव मंडल की उम्र घटना के समय केवल 20 वर्ष थी। जबकि दूसरा अभियुक्त दिलीप मंडल 45 वर्ष का था।

कोर्ट ने कहा कि,“जब आरोपी की उम्र 21 वर्ष से कम हो और अपराध धारा 304 पार्ट-II के अंतर्गत आता हो, तो हाईकोर्ट को परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 4 के तहत राहत पर विचार करना चाहिए था।”

इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने इस बिंदु पर नोटिस जारी किया है और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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अदालत का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने:

• देरी माफी की अर्जी स्वीकार की

• दस्तावेज़ों से छूट की अनुमति दी

• राज्य सरकार को नोटिस जारी किया

• मामले को अगली सुनवाई के लिए 10 फरवरी 2026 को सूचीबद्ध किया

कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिया कि वे राज्य सरकार के अधिवक्ता को पूरा पेपर बुक उपलब्ध कराएं।

Case Title: Kapildeo Mandal & Anr. vs State of Jharkhand

Case No.: SLP (Criminal) Diary No. 70266/2025

Decision Date: 27 January 2026

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