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सुप्रीम कोर्ट ने 33 साल पुराने हत्या मामले में सजा घटाई, 80 वर्षीय दोषी को फिर जेल भेजने से इनकार

Vivek G.
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श्रीकृष्ण बनाम मध्य प्रदेश राज्य, सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के हत्या मामले में दोष बरकरार रखते हुए 80 वर्षीय आरोपी की सजा घटाई, उम्र और परिस्थितियों को आधार बनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने 33 साल पुराने हत्या मामले में सजा घटाई, 80 वर्षीय दोषी को फिर जेल भेजने से इनकार

नई दिल्ली की अदालत में जब यह मामला सूचीबद्ध हुआ, तो माहौल बेहद गंभीर था। तीन दशक पुराने एक गांव के झगड़े से उपजा यह आपराधिक मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक पहुंचा। न्यायालय ने दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन सजा को लेकर मानवीय दृष्टिकोण अपनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के डुडनखेड़ी गांव में दिसंबर 1992 की एक शाम मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। अभियोजन के अनुसार, बच्चों के झगड़े की शिकायत लेकर राम सिंह आरोपी श्रीकृष्ण के घर पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और देखते ही देखते लाठी-डंडों से हमला शुरू हो गया।

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राम सिंह के सिर पर गंभीर चोट आई और इलाज के दौरान अगले दिन उनकी मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। सेशंस कोर्ट ने श्रीकृष्ण सहित अन्य आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

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मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा, तो वहां तथ्यों का दोबारा मूल्यांकन हुआ। अदालत ने माना कि यह घटना अचानक हुए समूह संघर्ष की थी, न कि पूर्व नियोजित हत्या की। इसी आधार पर श्रीकृष्ण की सजा को हत्या से घटाकर गैर-इरादतन हत्या (Section 304 Part II IPC) कर दिया गया और सात साल की सजा सुनाई गई।

सुप्रीम कोर्ट में यह सवाल केंद्र में था कि क्या आरोपी को दोबारा जेल भेजना न्यायोचित होगा। पीठ ने पूरे घटनाक्रम, मेडिकल साक्ष्यों और दोनों पक्षों की चोटों पर विस्तार से विचार किया।

अदालत ने कहा,

“यह मामला अचानक हुए झगड़े का है, जहां दोनों पक्षों को चोटें आईं। अभियुक्त की ओर से कोई पूर्व नियोजन सिद्ध नहीं होता।”

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अदालत की अहम टिप्पणियां

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सिर पर लाठी से किया गया वार गंभीर था और उससे मृत्यु हुई, इसलिए दोषसिद्धि सही है। लेकिन अदालत ने यह भी माना कि:

• घटना बिना पूर्व योजना के हुई

• आरोपी ने अकेला वार किया

• दोनों पक्षों में मुक्त झगड़ा (free fight) था

• आरोपी स्वयं भी गंभीर रूप से घायल हुआ

पीठ ने कहा,

“ऐसी परिस्थितियों में यह नहीं कहा जा सकता कि अभियुक्त की मंशा हत्या की थी, लेकिन उसे यह ज्ञान अवश्य था कि उसका कृत्य जानलेवा हो सकता है।”

सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे अहम तथ्य आरोपी की वर्तमान उम्र थी। श्रीकृष्ण अब 80 वर्ष से अधिक के हैं और पहले ही छह साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुके हैं।

पीठ ने टिप्पणी की,

“जीवन के इस पड़ाव पर आरोपी को फिर से कारावास में भेजना कठोर और अवांछनीय होगा। न्यायालय संवेदनहीन नहीं हो सकते।”

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सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला

अदालत ने हाईकोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि को सही ठहराया, लेकिन सजा में संशोधन करते हुए उसे पहले से भुगती गई अवधि तक सीमित कर दिया। इस प्रकार अपील आंशिक रूप से खारिज करते हुए सजा कम कर दी गई और मामला समाप्त हुआ।

Case Title: Shrikrishna vs State of Madhya Pradesh

Case No.: Criminal Appeal No. 1533 of 2011

Decision Date: 09 January 2026

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