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नीलामी की विश्वसनीयता पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, जीडीए को औद्योगिक भूखंड का आवंटन रद्द करना पड़ा भारी

Vivek G.
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गोल्डन फूड प्रोडक्ट्स इंडिया बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने जीडीए की नीलामी रद्द करने की कार्रवाई को मनमाना बताया और सर्वोच्च बोलीदाता के पक्ष में औद्योगिक भूखंड का आवंटन आदेशित किया।

नीलामी की विश्वसनीयता पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, जीडीए को औद्योगिक भूखंड का आवंटन रद्द करना पड़ा भारी

नई दिल्ली की अदालत कक्ष में सोमवार को माहौल गंभीर था। जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ी, यह साफ होता गया कि मामला केवल एक औद्योगिक भूखंड की नीलामी का नहीं, बल्कि सरकारी नीलामी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और भरोसे का है। Supreme Court of India ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की कार्रवाई पर कड़ी नजर रखते हुए अहम फैसला सुनाया।

मामला कैसे शुरू हुआ

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब Ghaziabad Development Authority ने अगस्त 2023 में मधुबन बापूधाम योजना के तहत औद्योगिक भूखंडों की नीलामी का विज्ञापन जारी किया। इसी नीलामी में Golden Food Products India ने 3150 वर्ग मीटर के औद्योगिक भूखंड के लिए तकनीकी और वित्तीय दोनों बोली सफलतापूर्वक दी।

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15 मार्च 2024 को हुई खुली नीलामी में कंपनी ने प्रति वर्ग मीटर ₹29,500 की बोली लगाई, जो तय रिज़र्व प्राइस ₹25,600 से लगभग 15 प्रतिशत अधिक थी। नीलामी में केवल दो ही बोलीदाता थे और Golden Food Products को सर्वोच्च बोलीदाता घोषित किया गया।

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लेकिन इसके बाद घटनाक्रम अचानक बदला।

कंपनी को आवंटन पत्र मिलने का इंतजार था। जवाब न मिलने पर आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी गई, तब पता चला कि जीडीए ने नीलामी ही रद्द कर दी है।

कारण बताया गया कि उसी योजना के तहत छोटे औद्योगिक भूखंडों को कहीं अधिक कीमत मिली थी, इसलिए इस बड़े भूखंड की बोली “कम” मानी गई।

यह फैसला Allahabad High Court में चुनौती दिया गया, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली।

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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा कि बड़े और छोटे भूखंडों की तुलना अपने आप में गलत है। अदालत ने कहा:

“केवल इस उम्मीद में कि भविष्य में ज्यादा कीमत मिल सकती है, वैध नीलामी को रद्द नहीं किया जा सकता।”

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि जब बोली रिज़र्व प्राइस से अधिक हो, नीलामी प्रक्रिया में कोई धोखाधड़ी या मिलीभगत न हो, तो उसे मनमाने ढंग से रद्द नहीं किया जा सकता।

अदालत के अनुसार, बिना नोटिस दिए बोली रद्द करना और बाद में सिर्फ जमानत राशि लौटाकर मामले को खत्म मान लेना, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

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अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के दोनों आदेश रद्द कर दिए। अदालत ने निर्देश दिया कि Golden Food Products India चार सप्ताह के भीतर जमानत राशि दोबारा जमा करे। इसके बाद जीडीए को दो सप्ताह के भीतर औद्योगिक भूखंड का आवंटन पत्र जारी करना होगा और नीलामी की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना होगा।

इसके साथ ही अपील स्वीकार कर ली गई और पक्षकारों को अपने-अपने खर्च वहन करने के निर्देश दिए गए।

Case Title: Golden Food Products India vs State of Uttar Pradesh & Ors.

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) Nos. 18095–18096 of 2024

Decision Date: 06 January 2026

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