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तीन FIR, एक विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी से राहत दी, कहा- चार्जशीट के बाद हिरासत जरूरी नहीं

Vivek G.
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श्रीमती शालिनी भाटेजा और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने तीन FIR से जुड़े मामले में बड़ा आदेश दिया। चार्जशीट के बाद गिरफ्तारी जरूरी नहीं, अभियुक्तों को जमानत का निर्देश।

तीन FIR, एक विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी से राहत दी, कहा- चार्जशीट के बाद हिरासत जरूरी नहीं

नई दिल्ली की ठंडी सुबह में जब यह मामला Supreme Court of India की आपराधिक पीठ के सामने लगा, तो बहस सिर्फ एक FIR तक सीमित नहीं थी। सवाल यह था कि क्या एक ही लेन-देन से जुड़े विवाद में बार-बार आपराधिक कार्यवाही चलाई जा सकती है, और क्या चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी अभियुक्तों की गिरफ्तारी जरूरी है।

मामला कैसे शुरू हुआ

मामला स्मिता शालिनी भाटेजा और एक अन्य से जुड़ा है, जिनके खिलाफ 9 जून 2025 को आगरा के ताजगंज थाने में FIR दर्ज की गई थी। आरोप था कि एक रिफंड की रकम को जानबूझकर किसी अन्य खाते में डलवाकर धोखाधड़ी की गई।

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याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह विवाद पूरी तरह से नागरिक (सिविल) प्रकृति का है, लेकिन दबाव बनाने के लिए इसे आपराधिक रंग दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि इसी विवाद पर तीन अलग-अलग जगहों पर तीन मामले दायर किए गए।

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सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि-

• दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में पहले ही एक FIR से जुड़ी कार्यवाही स्थगित की जा चुकी है।

• आगरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दाखिल एक अन्य आवेदन को “नॉट प्रेस्ड” कहकर वापस ले लिया गया।

राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में यह स्वीकार किया गया कि एक ही लेन-देन से जुड़े मामलों को अलग-अलग मंचों पर आगे बढ़ाया गया।

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अदालत की अहम टिप्पणियां

न्यायालय ने माना कि अब ताजगंज, आगरा की FIR में जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। खास बात यह रही कि जांच में आरोप साबित नहीं हुए, और यह बात अंतिम रिपोर्ट में दर्ज है।

पीठ ने स्पष्ट कहा,

“जब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, तो ऐसी कोई वजह नहीं है कि अभियुक्तों को हिरासत में लिया जाए।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि अन्य समान मामलों को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बचता।

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सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि-

• याचिकाकर्ता एक महीने के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट में पेश हों।

• पेश होते ही उन्हें जमानत दी जाए और उसी दिन आरोप पढ़कर सुनाए जाएं।

• जमानत की शर्तें ट्रायल कोर्ट अपने विवेक से तय करेगा।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया कि-

• दिल्ली और आगरा में समान तथ्यों पर चल रही अन्य कार्यवाहियां समाप्त मानी जाएंगी।

• शिकायतकर्ता की ओर से अब इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल अदालत में प्रतिनिधित्व कर सकेगा।

इन निर्देशों के साथ विशेष अनुमति याचिका का निपटारा कर दिया गया।

Case Title: Smt. Shalini Bhateja & Anr. vs State of U.P. & Ors.

Case No.: SLP (Crl.) No. 11375 of 2025

Case Type: Criminal

Decision Date: 06 January 2026

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