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ट्रांसफर विवाद पर सुलह: सिक्किम हाईकोर्ट ने आपसी समझ से खत्म की NHM कर्मचारी की याचिका

Vivek G.
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तुलसी शर्मा ढकाल बनाम सिक्किम राज्य एवं अन्य। सिक्किम हाईकोर्ट ने NHM कर्मचारी के ट्रांसफर विवाद पर आपसी सुलह के बाद रिट याचिका निस्तारित की, अधिकारियों ने कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया।

ट्रांसफर विवाद पर सुलह: सिक्किम हाईकोर्ट ने आपसी समझ से खत्म की NHM कर्मचारी की याचिका

सिक्किम हाईकोर्ट में शुक्रवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें कानून से ज़्यादा ज़रूरत आपसी बातचीत की थी। एक सरकारी कर्मचारी ने अपने ट्रांसफर को “अपमानजनक” बताते हुए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था। लेकिन सुनवाई के दौरान जो हुआ, उसने मामले की दिशा बदल दी।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए. मुहम्मद मुस्ताक की अदालत में यह याचिका अंततः आपसी सहमति से समाप्त हो गई।

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मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला Tulsi Sharma Dhakal बनाम State of Sikkim व अन्य से जुड़ा है । याचिकाकर्ता तुलसी शर्मा धाकल ने दावा किया कि उन्हें जिला अकाउंट्स मैनेजर के पद से हटाकर नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) में फाइनेंस एंड लॉजिस्टिक्स ऑफिसर (FLO) के पद पर भेजा गया।

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उनका आरोप था कि यह सामान्य प्रशासनिक निर्णय नहीं था। उन्होंने कुछ अधिकारियों के खिलाफ फंड के कथित दुरुपयोग की शिकायत की थी। उसी के बाद यह तबादला हुआ। उनका कहना था कि इससे उन्हें मानसिक पीड़ा और अपमान का सामना करना पड़ा।

दूसरी ओर, रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ भी कुछ शिकायतें दर्ज हुई थीं।

अदालत में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। खास बात यह रही कि कुछ अधिकारी स्वयं अदालत में उपस्थित थे। माहौल औपचारिक जरूर था, लेकिन बातचीत खुली रही।

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मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड देखने पर ऐसा नहीं लगता कि याचिकाकर्ता के किसी मौलिक अधिकार या वैधानिक सेवा अधिकार का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने टिप्पणी की,

“यह विवाद कार्यस्थल की गलतफहमियों से उपजा प्रतीत होता है, न कि किसी मौलिक अधिकार के हनन से।”

अदालत ने माना कि कई बार पेशेवर दबाव और संवाद की कमी से रिश्तों में खटास आ जाती है, जिससे आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है।

चैंबर में बातचीत और सुलह

न्यायालय ने औपचारिक सुनवाई के साथ-साथ आपसी संवाद पर भी ज़ोर दिया। चैंबर में हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने मतभेद दूर करने पर सहमति जताई।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “यदि प्रभावी संवाद का माध्यम पहले उपलब्ध होता, तो शायद यह मामला अदालत तक नहीं आता।”

यह भी दर्ज किया गया कि संबंधित अधिकारियों ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे याचिकाकर्ता के खिलाफ प्राप्त शिकायतों के आधार पर कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाएंगे।

अदालत की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश ने एक अहम बात कही। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल को अक्सर “पूजा स्थल” की तरह बताया जाता है, लेकिन वहां व्यक्तिगत शिकायतों के समाधान के लिए संवाद ज़रूरी है।

उन्होंने कहा, “संगठन में हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी है। किसी भी प्रतिकूल स्थिति के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय आत्ममंथन आवश्यक है।”

अदालत ने इस बात की सराहना की कि याचिकाकर्ता ने सभी संबंधित लोगों को एक मंच पर लाकर संवाद का अवसर दिया।

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अंतिम निर्णय

अदालत ने यह दर्ज करते हुए कि प्रतिवादी अधिकारी याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे और दोनों पक्ष आपसी सम्मान के साथ काम करेंगे, रिट याचिका को निस्तारित कर दिया।

इस प्रकार, W.P. (C) No. 70 of 2025 को आपसी समझौते के आधार पर बंद कर दिया गया। मामला यहीं समाप्त हुआ।

Case Title: Tulsi Sharma Dhakal vs. State of Sikkim & Ors.

Case No.: W.P. (C) No. 70 of 2025

Decision Date: 13 February 2026

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