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ट्रांसफर पर हाईकोर्ट सख्त: पसंदीदा पोस्टिंग का दावा नहीं कर सकता कर्मचारी

Shivam
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हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी अपनी पसंद की पोस्टिंग का अधिकार नहीं मांग सकता और प्रशासनिक ट्रांसफर में सीमित ही न्यायिक हस्तक्षेप संभव है। - गगनप्रीत सिंह वज़ीर बनाम भारतीय खाद्य निगम और अन्य।

ट्रांसफर पर हाईकोर्ट सख्त: पसंदीदा पोस्टिंग का दावा नहीं कर सकता कर्मचारी

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि सरकारी कर्मचारी अपनी पसंद की जगह पर पोस्टिंग का अधिकार नहीं मांग सकता। अदालत ने कहा कि ट्रांसफर सेवा का हिस्सा है और इसमें दखल सीमित परिस्थितियों में ही किया जा सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला गगनप्रीत सिंह वज़ीर बनाम फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया से जुड़ा है। याचिकाकर्ता, जो FCI में मैनेजर (डिपो) के पद पर कार्यरत थे, को जम्मू-कश्मीर से उत्तर प्रदेश ट्रांसफर कर दिया गया था।

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याचिकाकर्ता का दावा था कि:

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• उन्होंने अपने ट्रांसफर के लिए पंजाब, हरियाणा और दिल्ली को प्राथमिकता दी थी

• इसके बावजूद उन्हें उत्तर प्रदेश भेजा गया

• यह ट्रांसफर “दुर्भावना” (malice) के तहत किया गया

उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी उन्हें “कठिन क्षेत्र” (Kupwara) में पोस्ट किया गया था, जो उनके खिलाफ कार्रवाई जैसा था।

डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि:

“ट्रांसफर सेवा का एक अनिवार्य हिस्सा है और कोई कर्मचारी यह दावा नहीं कर सकता कि उसे एक ही स्थान पर रखा जाए।”

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कोर्ट ने यह भी कहा कि:

“किसे कहाँ ट्रांसफर करना है, यह पूरी तरह नियोक्ता (employer) का अधिकार है और अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती, जब तक स्पष्ट रूप से दुर्भावना या कानून का उल्लंघन साबित न हो।”

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए दोहराया कि ट्रांसफर गाइडलाइंस (नीतियां) कानूनी अधिकार नहीं देतीं, बल्कि प्रशासनिक निर्देश मात्र होती हैं।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उनका ट्रांसफर “दुर्भावना” के तहत हुआ।

लेकिन अदालत ने पाया:

• आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं दिए गए

• केवल सामान्य आरोप लगाए गए, जिनमें कोई विशिष्ट तथ्य नहीं थे

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कोर्ट ने कहा:

“सिर्फ ‘malice’ शब्द का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ठोस और स्पष्ट तथ्यों की आवश्यकता होती है।”

FCI की ओर से यह कहा गया कि:

• ट्रांसफर प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर किया गया

• संगठन की आवश्यकताओं के अनुसार पोस्टिंग तय होती है

अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि:

“कर्मचारी को देश में कहीं भी सेवा देने के लिए बाध्य किया जा सकता है, और यह सेवा की शर्तों का हिस्सा है।”

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अदालत ने पाया कि:

• ट्रांसफर प्रशासनिक आधार पर किया गया था

• दुर्भावना के आरोप साबित नहीं हुए

• केवल पसंदीदा स्थान न मिलने से ट्रांसफर अवैध नहीं हो जाता

इस आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखा।

Case Details

Case Title: Gaganpreet Singh Wazir v. Food Corporation of India & Ors.

Case Number: LPA No. 221/2025 in WP(C) No. 743/2025

Judge: Justice Sindhu Sharma & Justice Shahzad Azeem

Decision Date: 23 March 2026

Counsels:

• For Petitioner: Mr. Amit Gupta, Sr. Advocate with Mr. Aswad Attar

• For Respondents: Mr. Jahangir Iqbal Ganai, Sr. Advocate with Mr. Sheikh Umar Farooq

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