Logo

सहमति से बने संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता: त्रिपुरा हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी किया

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में आरोपी को बरी करते हुए कहा कि दोनों के बीच संबंध सहमति और लंबे प्रेम संबंध पर आधारित थे। - श्री सुकांत मुरासिंग बनाम त्रिपुरा राज्य

सहमति से बने संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता: त्रिपुरा हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी किया

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में दोषसिद्ध व्यक्ति को राहत देते हुए कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच लंबे समय तक प्रेम संबंध था और दोनों के बीच बने शारीरिक संबंध सहमति से थे। अदालत ने यह भी माना कि दोनों के बीच विवाह हुआ था और वह संबंध अब भी कायम था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला सुकांत मुरासिंग द्वारा दायर आपराधिक अपील से जुड़ा था। दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 31 जनवरी 2025 को आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1) के तहत दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई थी।

शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2013 में उसकी आरोपी से पहचान हुई थी। बाद में दोनों के बीच प्रेम संबंध बना। महिला का कहना था कि सितंबर 2017 में आरोपी ने विवाह का आश्वासन देकर उसके साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत में यह भी कहा गया कि जनवरी 2018 में दोनों ने विवाह किया और एक नोटराइज्ड घोषणा भी तैयार की गई।

महिला के अनुसार आरोपी ने सामाजिक रूप से विवाह करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में उसने सार्वजनिक विवाह से इनकार कर दिया। इसके बाद वर्ष 2022 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

न्यायमूर्ति डॉ. टी. अमरनाथ गौड़ और न्यायमूर्ति एस. दत्ता पुरकायस्थ की खंडपीठ ने मामले के रिकॉर्ड, बयान और साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया।

अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान में स्वयं स्वीकार किया था कि उसका आरोपी के साथ प्रेम संबंध था और दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बने थे। उसने यह भी स्वीकार किया कि आरोपी ने उससे विवाह किया था और वह कई बार आरोपी के घर भी जाती थी।

पीठ ने कहा,

“रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि दोनों के बीच प्रेम संबंध था और जो भी शारीरिक संबंध बने, वे सहमति से बने थे।”

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि शिकायतकर्ता ने शुरुआती समय में किसी प्रकार की आपत्ति या शिकायत दर्ज नहीं कराई और दोनों लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों से जबरन संबंध बनाने का आरोप स्थापित नहीं होता।

अदालत ने कहा कि मेडिकल साक्ष्य भी अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं करते। पीठ ने अपने आदेश में कहा,

“विवाह के भीतर सहमति से बने संबंधों को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।”

हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है।

पीठ ने कहा,

“अभियोजन अपना मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।” इसके साथ ही अदालत ने ट्रायल कोर्ट का दोषसिद्धि और सजा संबंधी आदेश रद्द कर दिया।

अदालत ने आरोपी को धारा 376(1) IPC के आरोप से बरी करते हुए निर्देश दिया कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।

Case Details

Case Title: Sri Sukanta Murasing v. State of Tripura

Case Number: Crl. A. (J) 16/2025

Judges: Justice Dr. T. Amarnath Goud and Justice S. Datta Purkayastha

Decision Date: May 13, 2026

Download Order

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates