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उन्नाव कांड: दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा निलंबन याचिका खारिज की, राहत से इनकार

Vivek G.
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कुलदीप सिंह सेंगर बनाम सीबीआई, दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की मौत मामले में कुलदीप सेंगर की सजा निलंबन याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा-राहत का कोई आधार नहीं।

उन्नाव कांड: दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सजा निलंबन याचिका खारिज की, राहत से इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने उसकी 10 साल की सजा निलंबित करने की मांग को खारिज करते हुए साफ कहा कि इस स्तर पर कोई राहत नहीं दी जा सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

साल 2018 में उन्नाव की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार को कोर्ट में पेशी के लिए बुलाया गया था। इसी दौरान पीड़िता के पिता पर दिनदहाड़े हमला हुआ। अगले ही दिन उन्हें अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस हिरासत में उनकी हालत बिगड़ती चली गई और 9 अप्रैल 2018 को उनकी मौत हो गई।

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बाद में जांच में सामने आया कि यह पूरी साजिश पीड़िता को चुप कराने के लिए रची गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रायल को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था।

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कोर्ट की टिप्पणी

जस्टिस रविंदर दुडेेजा की पीठ ने सोमवार को सेंगर की दूसरी सजा निलंबन याचिका को खारिज करते हुए कहा, “इस स्तर पर राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।”

अदालत ने माना कि सेंगर लगभग साढ़े सात साल से जेल में है, लेकिन यह भी कहा कि अपील में देरी के लिए वह खुद भी जिम्मेदार है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि आरोपी ने बार-बार अलग-अलग अर्जियां दाखिल कर कार्यवाही को लंबा किया।

न्यायालय ने यह भी कहा कि,“अपील को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना ही इस समय उचित कदम होगा।”

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क्या था सजा का आधार

मार्च 2020 में ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दोषी ठहराया था। हालांकि अदालत ने इसे हत्या नहीं बल्कि गैर-इरादतन हत्या माना और भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत 10 साल की सजा सुनाई थी।

कोर्ट ने उस समय कहा था कि, “एक परिवार के एकमात्र कमाने वाले की मौत पर कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।”

इस मामले में सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर सहित अन्य आरोपियों को भी सजा दी गई थी।

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हाईकोर्ट का अंतिम फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि मामले में कोई नया तथ्य सामने नहीं आया है, इसलिए सजा निलंबन का कोई आधार नहीं बनता। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि अपील पर जल्द सुनवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि हाल ही में हाईकोर्ट ने रेप केस में सेंगर की सजा अस्थायी रूप से निलंबित की थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी।

Case Title: Kuldeep Singh Sengar v. CBI

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