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उन्नाव केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत याचिका ठुकराई, दिल्ली HC को तीन महीने में फैसला का निर्देश

Vivek G.
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कुलदीप सिंह सेंगर बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो, उन्नाव केस में सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत याचिका खारिज की, दिल्ली हाईकोर्ट को तीन महीने में अपील निपटाने का आदेश।

उन्नाव केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत याचिका ठुकराई, दिल्ली HC को तीन महीने में फैसला का निर्देश

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में उन्नाव मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान अदालत का रुख सख्त नजर आया। पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की उस अपील पर कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में सजा निलंबन की मांग की थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 2018 का है, जब नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता और उसका परिवार उन्नाव कोर्ट में पेशी के लिए गया था। उसी दिन पीड़िता के पिता पर दिनदहाड़े हमला हुआ। अगले दिन पुलिस ने उन्हें अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया और कुछ ही समय बाद हिरासत में उनकी मौत हो गई।

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बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले समेत कुल पांच मामलों की सुनवाई उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित की गई। दिसंबर 2019 में सेंगर को दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी गई। मार्च 2020 में पीड़िता के पिता की मौत की साजिश के मामले में उन्हें 10 साल की सजा सुनाई गई।

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कोर्ट में क्या हुआ

सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सेंगर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने 10 साल की सजा में से 9 साल 7 महीने जेल में बिता लिए हैं। उन्होंने कहा, “टर्म सजा के मामलों में अपील लंबित रहते हुए सजा निलंबन सामान्य बात है।”

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इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने सवाल किया, “जब आप एक अन्य अपराध में उम्रकैद की सजा भी काट रहे हैं, तो क्या यह सजा निलंबन पर विचार के लिए प्रासंगिक नहीं है?”

सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मुख्य अपील पहले से ही दिल्ली HC में सूचीबद्ध है और इसे “आउट ऑफ टर्न” सुना जा सकता है।

पीड़ित पक्ष की दलील

पीड़ित परिवार की ओर से अधिवक्ता महमूद प्राचा ने बताया कि उन्होंने भी हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिसमें सजा को आईपीसी की धारा 304 से बढ़ाकर धारा 302 करने और उम्रकैद देने की मांग की गई है।

हालांकि, सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया में बयानबाजी पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “अगर आप इस मामले में वकील हैं तो मीडिया ट्रायल की कोई जगह नहीं है। बतौर CJI मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा।”

अदालत की टिप्पणी

पीठ ने साफ किया कि वह इस स्तर पर जमानत नहीं देगी, लेकिन मामले की लंबी अवधि को देखते हुए अपील की शीघ्र सुनवाई जरूरी है। अदालत ने कहा, “दिल्ली हाईकोर्ट इस अपील को एक सप्ताह के भीतर सूचीबद्ध करे और यदि संभव हो तो सह-आरोपियों और पीड़ित की अपील के साथ मिलकर फैसला करे।”

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फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत याचिका खारिज कर दी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह पीड़िता के पिता की मौत से जुड़े मामले में सेंगर की अपील पर “आउट ऑफ टर्न” सुनवाई करे और अधिकतम तीन महीने के भीतर निर्णय दे।

Case Title: Kuldeep Singh Sengar vs Central Bureau of Investigation

Case No.: SLP (Crl) No. 2204/2026

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