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क्या अदालत में अपने वकील द्वारा कही गई बात को पलट सकते हैं? हरियाणा हत्याकांड मामले में हाई कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया।

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हाईकोर्ट ने वकील के बयान से मुकरने की कोशिश को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया, कहा यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। - Ankit Rawal v. State of Haryana

क्या अदालत में अपने वकील द्वारा कही गई बात को पलट सकते हैं? हरियाणा हत्याकांड मामले में हाई कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में यह साफ कर दिया कि अदालत में वकील द्वारा दिया गया बयान यूं ही वापस नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने एक आरोपी की उस अर्जी को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपने वकील के कथित “बिना निर्देश” दिए गए बयान के आधार पर पुराने आदेश को वापस लेने की मांग की थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला पानीपत जिले में दर्ज एक हत्या (धारा 302 IPC) से जुड़ा है। FIR के अनुसार, 29 सितंबर 2023 की रात मृतक तसव्वर पर कुछ लोगों ने धारदार हथियारों और डंडों से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई।

जांच के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, हथियार और खून से सने कपड़े बरामद हुए और CCTV फुटेज भी जुटाई गई। इसी मामले में याचिकाकर्ता अंकित रावल का नाम भी सामने आया।

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पहले, आरोपी ने अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, लेकिन उसे 28 जनवरी 2026 को वापस ले लिया गया था, यह कहते हुए कि वह निचली अदालत में पेश होकर नियमित जमानत मांगेगा।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उसके वकील ने बिना उसकी अनुमति के यह बयान दिया था कि वह 7 दिनों के भीतर अदालत में पेश होगा।

वकील ने दलील दी कि:

• याचिकाकर्ता का नाम FIR में नहीं है

• उसके खिलाफ कोई स्पष्ट भूमिका नहीं बताई गई

• केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर उसे फंसाया गया

• कुछ गवाह पहले ही hostile हो चुके हैं

राज्य सरकार की ओर से इसका कड़ा विरोध किया गया।

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सरकारी वकील ने कहा कि:

• पहले आदेश में वकील का बयान स्पष्ट रूप से दर्ज है

• मामला गंभीर है और हत्या से जुड़ा है

• जांच अभी जारी है और हिरासत में पूछताछ जरूरी है

न्यायमूर्ति सुमीत गोयल ने स्पष्ट कहा कि:

“अदालत यह मानकर चलती है कि वकील द्वारा दिया गया बयान पूरी तरह अधिकृत होता है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि हर बार कोई पक्ष यह कहने लगे कि वकील ने बिना निर्देश बयान दिया, तो न्यायिक प्रक्रिया ही अस्थिर हो जाएगी।

“ऐसी दलीलें स्वीकार करना न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करेगा और हर आदेश को चुनौती के लिए खोल देगा।”

कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता का यह प्रयास “प्रक्रिया का दुरुपयोग” है और इसे सख्ती से रोका जाना चाहिए।

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कोर्ट ने कहा कि:

• अपराध गंभीर है (हत्या)

• जांच अभी शुरुआती चरण में है

• आरोपी की भूमिका जांच में सामने आई है

“इस स्तर पर अग्रिम जमानत देना जांच में बाधा डाल सकता है।”

हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए ₹20,000 का जुर्माना लगाया।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि:

• यह राशि 4 सप्ताह के भीतर CJM, पानीपत के पास जमा कराई जाए

• जमा राशि हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी जाएगी

• यदि भुगतान नहीं किया गया तो इसे भूमि राजस्व की तरह वसूला जाएगा

साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का ट्रायल पर कोई असर नहीं पड़ेगा और जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी।

Case Title: Ankit Rawal v. State of Haryana

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