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विनेश फोगाट चयन परीक्षण मामले में WFI के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणियों को सुप्रीम कोर्ट ने हटाने से इनकार कर दिया।

CB News Desk
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सुप्रीम कोर्ट ने विनीश फोगाट को एशियन गेम्स ट्रायल में भाग लेने की अनुमति देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट आदेश के खिलाफ WFI की याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए बंद कर दिया।

 विनेश फोगाट चयन परीक्षण मामले में WFI के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणियों को सुप्रीम कोर्ट ने हटाने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 जून) को भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) की उस याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत पहलवान विनीश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। हालांकि शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट की टिप्पणियों को हटाने से इनकार कर दिया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि उसके आदेश को उन टिप्पणियों की पुष्टि नहीं माना जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद तब शुरू हुआ जब WFI ने विनीश फोगाट को एशियन गेम्स चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति नहीं दी। महासंघ का कहना था कि ट्रायल के लिए पात्रता केवल 2025 और 2026 में आयोजित कुछ विशेष प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं तक सीमित थी, जबकि फोगाट ने उन प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लिया था।

फोगाट ने 2024 पेरिस ओलंपिक के बाद संन्यास की घोषणा की थी, लेकिन दिसंबर 2025 में उन्होंने वापसी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि उन्हें अनुचित तरीके से बाहर रखा गया है।

22 मई को दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया शामिल थे, ने फोगाट को चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी थी।

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हाईकोर्ट ने कहा था कि WFI की चयन नीति "स्पष्ट रूप से बहिष्करणकारी" प्रतीत होती है। अदालत ने यह भी कहा कि मातृत्व अवकाश लेने वाली महिला खिलाड़ियों को इसके कारण खेल अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता।

खंडपीठ ने WFI द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस की भाषा पर भी कड़ी आपत्ति जताई थी और महासंघ के रवैये को अनुचित बताया था।

WFI ने हाईकोर्ट के आदेश और उसमें की गई टिप्पणियों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने फोगाट को ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दी थी, लेकिन मामले को लंबित रखा था।

इसके बाद फोगाट ने चयन ट्रायल में हिस्सा लिया, हालांकि वह क्वालीफाई नहीं कर सकीं।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान WFI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एन. गोबुरधुन ने अदालत से अनुरोध किया कि हाईकोर्ट द्वारा महासंघ के खिलाफ की गई टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाया जाए।

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में "मालाफाइड" और अन्य प्रतिकूल टिप्पणियां लंबित कार्यवाही को प्रभावित कर सकती हैं।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि अब यह याचिका निष्प्रभावी (Infructuous) हो चुकी है, क्योंकि चयन ट्रायल संपन्न हो चुके हैं और फोगाट उसमें भाग ले चुकी हैं।

पीठ ने कहा,

"बाद की घटनाओं को देखते हुए यह विशेष अनुमति याचिका निष्प्रभावी हो गई है। इस न्यायालय के आदेश को हाईकोर्ट के निष्कर्षों और टिप्पणियों की पुनरावृत्ति या पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाएगा। सभी मुद्दे खुले रखे जाते हैं।"

अदालत ने WFI की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें हाईकोर्ट की टिप्पणियों को हटाने का अनुरोध किया गया था। इसके साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया।

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