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रेलवे कर्मचारी की सैलरी रोकना गैरकानूनी: सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS लखनऊ मेडिकल बोर्ड का आदेश दिया

Vivek G.
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अनुराग शर्मा बनाम जनरल मैनेजर, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे कर्मचारी की सैलरी रोकने को अवैध बताया, AIIMS लखनऊ में मेडिकल बोर्ड जांच और बकाया वेतन भुगतान का आदेश दिया।

रेलवे कर्मचारी की सैलरी रोकना गैरकानूनी: सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS लखनऊ मेडिकल बोर्ड का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने रेलवे कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। अदालत ने साफ कहा कि बिना जांच के किसी कर्मचारी की सैलरी रोकना या घटाना कानूनन गलत है। मामला एक सहायक लोको पायलट से जुड़ा है, जो ड्यूटी के दौरान घायल हो गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

अपीलकर्ता अनुराग शर्मा को 22 नवंबर 2013 को भारतीय रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के रूप में नियुक्त किया गया था। 13 अप्रैल 2023 को वह ड्यूटी के दौरान रेलवे ब्रिज की सीढ़ियों से उतरते समय गिर पड़े। इस हादसे में उनके दाहिने घुटने में गंभीर फ्रैक्चर हुआ।

पहले उनका इलाज रेलवे अस्पताल, झांसी में हुआ। बाद में उन्हें फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 20 जून 2023 को लिगामेंट सर्जरी हुई। इसके बाद 31 दिसंबर 2023 को उन्हें सेंट्रल हॉस्पिटल, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज में दोबारा भर्ती होना पड़ा।

मेडिकल सलाह और प्रशासन की चूक

सीनियर डिविजनल मेडिकल ऑफिसर (ऑर्थोपेडिक्स) ने साफ सलाह दी थी कि

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• एक मेडिकल बोर्ड बनाया जाए

• कर्मचारी की मेडिकल फिटनेस का आकलन हो

• और तब तक उन्हें हल्का काम दिया जाए

लेकिन, न तो मेडिकल बोर्ड बनाया गया और न ही हल्की ड्यूटी दी गई। इसके उलट, 27 अप्रैल 2024 को एक फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया, जिसमें उन्हें बिना मेडिकल बोर्ड के ही फिट घोषित कर दिया गया।

हालात यहीं नहीं रुके। 25 जुलाई 2024 को लगातार दर्द के कारण उन्हें फिर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। 29 जुलाई 2024 को जारी सर्टिफिकेट ने साफ दिखा दिया कि उनकी हालत अभी भी ठीक नहीं थी।

सैलरी रोकने पर उठा बड़ा सवाल

इलाज के दौरान ही रेलवे प्रशासन ने जनवरी 2024 से जून 2024 तक उनकी सैलरी आधी कर दी और जुलाई 2024 से पूरी तरह बंद कर दी। इससे कर्मचारी को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।

निराश होकर अनुराग शर्मा ने पहले सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल, इलाहाबाद का रुख किया। वहां से मेडिकल बोर्ड बनाने के निर्देश तो मिले, लेकिन सैलरी के मुद्दे पर कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा, जिसने हावड़ा ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल में मेडिकल बोर्ड से जांच का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि हावड़ा काफी दूर है और अब उनकी जांच AIIMS लखनऊ में कराई जानी चाहिए, जो उनके लिए ज्यादा सुविधाजनक है।

सैलरी के मुद्दे पर भी सवाल उठाया गया कि बिना किसी जांच या अनुशासनात्मक कार्यवाही के वेतन कैसे रोका जा सकता है।

अदालत ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,“किसी भी कर्मचारी की सैलरी बिना उचित जांच और नियमों के पालन के रोकी या घटाई नहीं जा सकती। ऐसा करना मनमाना और अवैध है।”

कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि:

• अपीलकर्ता की जांच AIIMS लखनऊ में गठित मेडिकल बोर्ड से कराई जाए

• मेडिकल बोर्ड यह तय करे कि वह रनिंग ड्यूटी के लिए फिट हैं या नहीं

• यदि फिट नहीं हैं, तो हल्की ड्यूटी या वैकल्पिक रोजगार पर विचार किया जाए

• रेलवे प्रशासन को जनवरी 2024 से अब तक की पूरी बकाया सैलरी और भत्ते दो हफ्ते के भीतर जारी करने होंगे

इन निर्देशों के साथ अदालत ने सिविल अपील का निपटारा कर दिया।

Case Title: Anurag Sharma vs General Manager, North Central Railways & Ors.

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 29215 of 2025

Decision Date: 24 November 2025

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