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10 साल तक कॉन्ट्रैक्ट पर काम कराना गलत: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति का आदेश दिया

Vivek G.
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भोला नाथ और अन्य बनाम झारखंड राज्य, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को बड़ा झटका देते हुए 10 साल से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया। पूरा फैसला पढ़ें।

10 साल तक कॉन्ट्रैक्ट पर काम कराना गलत: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कहा है कि राज्य सरकारें वर्षों तक कर्मचारियों से काम लेकर उन्हें “कॉन्ट्रैक्ट” के नाम पर अनिश्चितता में नहीं रख सकतीं। अदालत ने झारखंड सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा लेने के बाद कर्मचारियों को नियमित न करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

यह फैसला भोलानाथ बनाम झारखंड राज्य सहित तीन अपीलों में दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

साल 2012 में झारखंड सरकार के भूमि संरक्षण निदेशालय में 22 जूनियर इंजीनियर (कृषि) के पदों पर नियुक्तियां की गई थीं।

इन पदों के लिए:

• विधिवत विज्ञापन निकाला गया

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• चयन प्रक्रिया पूरी की गई

• नियुक्तियां सरकारी स्वीकृत पदों पर हुईं

• नियुक्ति “संविदा” (Contract) आधार पर की गई

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इन कर्मचारियों को हर साल सेवा विस्तार मिलता रहा और वे लगातार 10 साल से अधिक काम करते रहे।

लेकिन 2022–23 में सरकार ने अचानक आगे विस्तार देने से मना कर दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट का रुख क्या था?

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा था कि-

• कर्मचारी संविदा पर थे

• उन्हें नियमित होने का कोई कानूनी अधिकार नहीं

• सरकार पर नियमित करने की बाध्यता नहीं है

इसी फैसले को चुनौती देकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति विक्रम नाथ कर रहे थे, ने कहा:

“राज्य एक मॉडल एम्प्लॉयर होता है। वह वर्षों तक कर्मचारियों से काम लेकर उन्हें अचानक बाहर नहीं कर सकता।”

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कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि-

• राज्य और कर्मचारी के बीच शक्ति का संतुलन बराबर नहीं होता

• कर्मचारी मजबूरी में शर्तें मानता है

• ऐसे अनुबंधों को “शेर और मेमने” के रिश्ते जैसा बताया

अदालत ने यह भी कहा:

“संविदा की शर्तें संविधान से ऊपर नहीं हो सकतीं। मौलिक अधिकारों का त्याग नहीं कराया जा सकता।”

संविधान और कानून की व्याख्या

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि-

• अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन हुआ है

• सरकार ने मनमाना रवैया अपनाया

• वर्षों तक सेवा लेने के बाद हटाना अन्यायपूर्ण है

• “उमादेवी केस” का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता

कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि:

“लगातार सेवा और बार-बार एक्सटेंशन मिलने से कर्मचारी को वैध उम्मीद (Legitimate Expectation) होती है।”

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कोर्ट का अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश देते हुए कहा:

• झारखंड सरकार कर्मचारियों की सेवाएं तुरंत नियमित करे

• सभी को नियमित कर्मचारी के समान लाभ दिए जाएं

• हाईकोर्ट के तीनों फैसले रद्द किए जाते हैं

• कॉन्ट्रैक्ट के नाम पर शोषण असंवैधानिक है

“राज्य को मॉडल नियोक्ता की तरह व्यवहार करना होगा, न कि ठेकेदार की तरह।”

निष्कर्ष

यह फैसला देशभर के लाखों संविदा कर्मचारियों के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि-

“सरकार संविदा के नाम पर वर्षों तक सेवा लेकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।”

Case Title: Bhola Nath & Ors. vs State of Jharkhand

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 30762/2024

Decision Date: 30 January 2026

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