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ज़मीन विवाद में तीन हत्याओं पर मौत की सज़ा बरकरार: पटना हाईकोर्ट ने ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ माना मामला

Shivam
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बिहार राज्य बनाम अमन सिंह और अन्य - पटना उच्च न्यायालय ने भूमि विवाद को लेकर रोहतास में हुए तिहरे हत्याकांड में मौत की सजा की समीक्षा की, जिसमें एफआईआर में देरी, गवाहों की गवाही और निचली अदालत के निष्कर्षों का विश्लेषण किया गया।

ज़मीन विवाद में तीन हत्याओं पर मौत की सज़ा बरकरार: पटना हाईकोर्ट ने ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ माना मामला

पटना हाईकोर्ट ने रोहतास ज़िले के एक जघन्य तिहरे हत्याकांड में निचली अदालत द्वारा दी गई मौत की सज़ा को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में आता है, जहाँ उम्रकैद का विकल्प भी न्यायसंगत नहीं होगा। हाईकोर्ट ने दोनों दोषियों की अपील खारिज करते हुए डेथ रेफरेंस को मंज़ूरी दी।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला 13 जुलाई 2021 का है। रोहतास ज़िले के दरीहट थाना क्षेत्र के खुदरांव गांव में ज़मीन को लेकर पुराने विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। अभियोजन के अनुसार, एक ही परिवार के तीन सदस्य विजय सिंह और उनके दो बेटे पर तलवार से हमला किया गया। तीनों की मौके पर या अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया और जांच के बाद आरोप पत्र दाख़िल किया। निचली अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी।

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ट्रायल के दौरान अभियोजन ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों पर भरोसा किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कई गहरे और जानलेवा घाव दर्ज थे, जिन्हें धारदार हथियार से किया गया बताया गया। कोर्ट ने पाया कि मेडिकल साक्ष्य प्रत्यक्षदर्शी बयान से मेल खाते हैं और घटना की जगह, समय व तरीके पर कोई गंभीर विरोधाभास नहीं है।

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दोषियों की ओर से FIR में देरी, शुरुआती सूचना दबाने और गवाहों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए। यह भी कहा गया कि मौत की सज़ा की जगह उम्रकैद पर विचार किया जाना चाहिए। बचाव ने सुधार की संभावना और अनुपातिक दंड का तर्क रखा।

अदालत की टिप्पणियाँ

डिवीजन बेंच न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सौरेंद्र पांडे ने बचाव की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि FIR में कथित देरी परिस्थितियों में स्वाभाविक थी और इससे अभियोजन की कहानी कमज़ोर नहीं होती।

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बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

“तीन निहत्थे व्यक्तियों पर तलवार से बार-बार हमला किया गया, जिससे उनके बचने की कोई संभावना नहीं छोड़ी गई।”

अदालत ने माना कि अपराध की प्रकृति अत्यंत क्रूर और अमानवीय है। दूसरे न्यायाधीश ने सहमति जताते हुए टिप्पणी की कि पारिवारिक ज़मीन विवाद में रिश्तों की मर्यादा टूटना समाज के लिए गंभीर संदेश है।

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हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के बचन सिंह और मच्छी सिंह फैसलों में तय सिद्धांतों का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में प्रतिकूल परिस्थितियाँ इतनी प्रबल हैं कि किसी भी रियायत की गुंजाइश नहीं बचती। सुधार की संभावना का तर्क भी अदालत को संतुष्ट नहीं कर सका।

अंतिम निर्णय

पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फ़ैसले को बरकरार रखते हुए डेथ रेफरेंस की पुष्टि की और दोनों दोषियों की आपराधिक अपील खारिज कर दी।

अदालत ने इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मामला मानते हुए मौत की सज़ा को उचित ठहराया।

Case Title: State of Bihar v. Aman Singh & Anr.

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