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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नाबालिग के धर्म परिवर्तन के मामले में आरोपी स्कूली छात्रा को अग्रिम जमानत दी।

Shivam
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन के कथित दबाव वाले मामले में आरोपी छात्रा को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि फिलहाल रिकॉर्ड पर सीमित सामग्री मौजूद है। - मालिशका @ मालिशका फातिमा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नाबालिग के धर्म परिवर्तन के मामले में आरोपी स्कूली छात्रा को अग्रिम जमानत दी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन के कथित दबाव से जुड़े एक मामले में आरोपी छात्रा मलिश्का उर्फ मलिश्का फातमा को अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि फिलहाल रिकॉर्ड पर पीड़िता के बयान के अलावा ऐसा कोई अन्य ठोस सामग्री नहीं है, जिससे आरोपी की भूमिका स्पष्ट रूप से साबित होती हो।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला मुरादाबाद जिले के बिलारी थाना क्षेत्र में दर्ज केस क्राइम नंबर 21/2026 से जुड़ा है। एफआईआर पीड़िता के भाई ने दर्ज कराई थी। आरोप था कि नाबालिग लड़की का “ब्रेनवॉश” कर उसका धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि उसे बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया गया और लगातार धर्म बदलने का दबाव बनाया गया।

आरोपी पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया कि मलिश्का केवल सहपाठी है और उसके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि मामले में मुख्य आरोप किसी अन्य छात्रा पर हैं, जिसे पहले ही हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है।

सरकारी वकील और शिकायतकर्ता की ओर से जमानत का विरोध किया गया। उन्होंने अदालत को बताया कि पीड़िता ने बीएनएसएस की धारा 180 और 183 के तहत दर्ज अपने बयान में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव और मानसिक प्रभाव डालने की बात कही है।

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वहीं, बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी छात्रा का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और जांच में सहयोग करने की उसकी पूरी मंशा है। अदालत को यह भी बताया गया कि आरोपी पहले से उसी इंटर कॉलेज में पढ़ रही थी, बाद में पीड़िता ने वहां प्रवेश लिया।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत पर फैसला करते समय आरोपों की गंभीरता, आरोपी का आपराधिक इतिहास, गिरफ्तारी की आशंका और जांच में सहयोग जैसे पहलुओं पर विचार करना जरूरी होता है।

पीठ ने कहा,

“रिकॉर्ड पर पीड़िता के बयान के अलावा फिलहाल ऐसा कोई अन्य सामग्री नहीं है, जिससे आरोपी की संलिप्तता स्पष्ट रूप से स्थापित होती हो।” अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उसके फरार होने की आशंका कम है।

हाईकोर्ट ने आरोपी मलिश्का उर्फ मलिश्का फातमा को अग्रिम जमानत देते हुए निर्देश दिया कि वह 30 दिनों के भीतर जांच अधिकारी या ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित हो। अदालत ने 25,000 रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों की शर्त पर राहत दी।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और ट्रायल कोर्ट मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

Case Details

Case Title: Malishka @ Malishka Fatma vs State of U.P. and Another

Judge: Justice Avnish Saxena

Decision Date: May 4, 2026

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