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पूछताछ में ‘स्मार्ट’ होना सहयोग से इनकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने रिश्वत मामले में आरोपी रवजीत सिंह को अग्रिम जमानत दी

Vivek G.
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रवजीत सिंह बनाम केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पूछताछ में स्मार्ट जवाब देना जांच में असहयोग नहीं है और CBI केस में आरोपी रवजीत सिंह को अग्रिम जमानत दे दी।

पूछताछ में ‘स्मार्ट’ होना सहयोग से इनकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने रिश्वत मामले में आरोपी रवजीत सिंह को अग्रिम जमानत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि पूछताछ के दौरान किसी आरोपी का “स्मार्ट” तरीके से जवाब देना यह नहीं दर्शाता कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। अदालत ने इसी आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज मामले में आरोपी रवजीत सिंह को अग्रिम जमानत दे दी।

यह आदेश न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की एकल पीठ ने 12 मार्च 2026 को पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला CBI द्वारा दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) के तहत आरोप लगाए गए हैं।

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अभियोजन के अनुसार, इस मामले का मुख्य आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक शर्मा है, जिस पर आरोप है कि उसने रक्षा निर्माण, लॉजिस्टिक्स और निर्यात से जुड़ी निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर भ्रष्ट गतिविधियों में संलिप्तता दिखाई।

जांच एजेंसी का दावा है कि इन कंपनियों को सरकारी विभागों और मंत्रालयों से अनुचित लाभ दिलाने के लिए साजिश रची गई। इसी साजिश के तहत आरोपी रवजीत सिंह की भूमिका सामने आई, जो कथित रूप से दुबई स्थित कंपनी डी.पी. वर्ल्ड के भारत में संचालन का प्रबंधन कर रहा था।

CBI के अनुसार, आरोप है कि सरकारी विभागों और विशेष रूप से विदेश मंत्रालय से कुछ मंजूरियां दिलाने के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक शर्मा के साथ मिलकर अवैध लाभ देने की योजना बनाई गई। जांच एजेंसी का कहना है कि इस साजिश के तहत तीन लाख रुपये की अवैध रकम दीपक शर्मा को दी गई, जिसे CBI ने छापे के दौरान बरामद किया।

सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस मामले के मुख्य आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक शर्मा को पहले ही जमानत मिल चुकी है। ऐसे में समानता के सिद्धांत के आधार पर रवजीत सिंह को भी राहत मिलनी चाहिए, खासकर जब उसके खिलाफ भूमिका अपेक्षाकृत कम बताई गई है।

दूसरी ओर CBI ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और पूछताछ के लिए जारी नोटिसों के बावजूद शामिल नहीं हुआ।

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हालांकि अदालत ने पाया कि जांच एजेंसी का विरोध मुख्य रूप से इसी आधार पर था कि आरोपी पूछताछ में सहयोग नहीं करेगा।

अदालत के सामने यह भी बताया गया कि जांच एजेंसी ने जिन साक्ष्यों पर भरोसा किया है, उनमें प्रमुख रूप से व्हाट्सएप चैट शामिल हैं।

लेकिन अदालत ने नोट किया कि ये चैट सीधे डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में नहीं बल्कि स्क्रीनशॉट के रूप में पेश किए गए हैं।

इस पहलू को अदालत ने मामले के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री को देखते हुए पूरे मामले की परिस्थितियों का आकलन किया।

जांच में सहयोग को लेकर CBI की दलील पर अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की।

पीठ ने कहा:

“सिर्फ इस वजह से कि कोई आरोपी पूछताछ के दौरान सवालों के जवाब ‘स्मार्ट’ तरीके से देता है, यह नहीं कहा जा सकता कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा है।”

अदालत ने आगे कहा कि किसी भी व्यक्ति पर यह बाध्यता नहीं है कि वह पूछताछ के दौरान “स्मार्ट” न हो। न्यायालय ने टिप्पणी की कि पूछताछ करने वाले अधिकारी को आवश्यक जानकारी निकालने के लिए अधिक सक्षम और प्रभावी होना चाहिए।

पीठ ने यह भी नोट किया कि CBI ने यह आशंका व्यक्त नहीं की कि आरोपी अग्रिम जमानत मिलने के बाद फरार हो जाएगा या जांच से बचने की कोशिश करेगा।

सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में मुख्य चार्जशीट 16 फरवरी 2026 को दाखिल की जा चुकी है।

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हालांकि CBI ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है और पूरक चार्जशीट दाखिल की जानी है।

एजेंसी ने अदालत से अनुरोध किया कि आरोपी को जांच में शामिल होने का निर्देश दिया जाए ताकि आगे की जांच समय पर पूरी की जा सके।

मामले की समग्र परिस्थितियों और मुख्य आरोपी को पहले से मिली जमानत को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने रवजीत सिंह की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

अदालत ने निर्देश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में आरोपी को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार पर रिहा किया जाएगा।

इसके साथ ही अदालत ने यह शर्त भी लगाई कि आरोपी जांच अधिकारी द्वारा लिखित रूप में बुलाए जाने पर जांच में शामिल होगा और किसी भी तरह से साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा।

Case Title: Ravjeet Singh vs Central Bureau of Investigation

Case No.: BAIL APPLN. 328/2026

Decision Date: 12 March 2026

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