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बिना गिरफ्तारी के मेडिकल टेस्ट कैसे किया गया?” कर्नाटक हाई कोर्ट ने फार्म रेड मामले में पुलिस से सवाल किया।

Shivam
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने एलावोमा फार्म रेड मामले में बिना स्पष्ट गिरफ्तारी दस्तावेज के आरोपी से रक्त और मूत्र के नमूने लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राज्य से रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है। - श्रीमती इमान अब्बास टोपीवाला बनाम कर्नाटक राज्य

बिना गिरफ्तारी के मेडिकल टेस्ट कैसे किया गया?” कर्नाटक हाई कोर्ट ने फार्म रेड मामले में पुलिस से सवाल किया।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में एलावोमा फार्म रेड मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि यदि आरोपी को विधिवत गिरफ्तार नहीं किया गया था, तो उसका मेडिकल परीक्षण और रक्त के नमूने कैसे लिए गए।

यह टिप्पणी उस समय की गई जब अदालत एक महिला आरोपी द्वारा दायर आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ के समक्ष हुई। यह मामला मई 2025 में कर्नाटक के एलावोमा फार्म में हुई एक पुलिस रेड से जुड़ा है।

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राज्य के अनुसार, इस रेड के दौरान पुलिस ने हशीश, कोकीन और हाइड्रोपोनिक गांजा सहित कई नशीले पदार्थ बरामद किए थे।

याचिकाकर्ता महिला पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस एक्ट, 1985 (NDPS Act) तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि, याचिकाकर्ता का कहना है कि उसके पास से कोई भी प्रतिबंधित पदार्थ बरामद नहीं हुआ और उसका नाम जब्ती पंचनामा में भी दर्ज नहीं है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता अभिमन्यु देवैया और अखिल अतीक ने अदालत को बताया कि महिला 25 मई 2025 को फार्म में आयोजित एक जन्मदिन समारोह में मौजूद थी।

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उनका कहना था कि पुलिस उसे हिरासत में लेकर उसी दिन छोड़ दिया गया, लेकिन गिरफ्तारी का कोई मेमो या गिरफ्तारी के आधार की जानकारी नहीं दी गई। इसके बावजूद पुलिस ने उसका रक्त और मूत्र का नमूना लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया।

वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि रेड के दौरान कुल 31 लोगों को हिरासत में लिया गया था। याचिकाकर्ता का बयान दर्ज किया गया, उसका मेडिकल परीक्षण किया गया और बाद में उसे छोड़ दिया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा:

“बिना गिरफ्तारी के मेडिकल परीक्षण कैसे किया गया? अगर गिरफ्तार किया गया था तो गिरफ्तारी के आधार क्या हैं?”

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अदालत ने आगे कहा:

“कम से कम एक गिरफ्तारी मेमो तो होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ा गया, तो उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।”

अदालत ने इस संदर्भ में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 51 का भी उल्लेख किया, जो पुलिस अधिकारी के अनुरोध पर आरोपी के मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया निर्धारित करती है।

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हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह यह स्पष्ट करने के लिए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करे कि आरोपी को किस आधार पर हिरासत में लिया गया और उसका मेडिकल परीक्षण किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की गई है।

Case Title: Smt. Eman Abbas Topiwala vs. State of Karnataka

Case Number: Crl. P. 3020/2026

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