Logo

बिना नोटिस दुकान गिराने पर रोक: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम को सुनवाई का आदेश दिया

Rajan Prajapati
Add Court Book as a preferred source on Google

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस दुकान गिराना गलत है। नगर निगम को पहले सुनवाई और कारण सहित आदेश देना होगा। - के. श्रीनिवासुलु बनाम आंध्र प्रदेश राज्य एवं अन्य।

बिना नोटिस दुकान गिराने पर रोक: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम को सुनवाई का आदेश दिया

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि लंबे समय से कब्जे में मौजूद संपत्ति को बिना नोटिस और सुनवाई के नहीं तोड़ा जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों का पालन सामान्य नियम है, अपवाद नहीं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला कडप्पा के निवासी के. श्रीनिवासुलु द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि नगर निगम उनकी दो दुकानों को सड़क चौड़ीकरण के नाम पर गिराने की कोशिश कर रहा है, जबकि इसके लिए न तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई और न ही कोई मुआवजा दिया गया।

याचिकाकर्ता का कहना था कि यह संपत्ति उनके परिवार द्वारा 1967 में खरीदी गई थी और तब से वे वहां व्यापार कर रहे हैं। वे नियमित रूप से संपत्ति कर और बिजली बिल भी भरते रहे हैं।

दूसरी ओर, नगर निगम ने दावा किया कि दुकानें सड़क पर अतिक्रमण (encroachment) हैं और सार्वजनिक हित में उन्हें हटाया जा रहा है।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

सुनवाई के दौरान अदालत ने धारा 405, आंध्र प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1955 की व्याख्या की। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान बिना नोटिस अतिक्रमण हटाने की अनुमति देता है, लेकिन यह एक “विकल्प” है, अनिवार्यता नहीं।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा:

“बिना सूचना दिए अतिक्रमण हटाने की शक्ति का प्रयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि:

"प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सामान्य नियम के रूप में पालन किया जाना चाहिए, और उनका अपवर्जन केवल अपवाद के रूप में ही किया जा सकता है।"

जज ने पाया कि याचिकाकर्ता लंबे समय से उस संपत्ति के कब्जे में है और उसने मालिकाना हक का भी दावा किया है। ऐसे मामलों में बिना नोटिस कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।

अदालत ने रिट याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए नगर निगम को निर्देश दिया कि:

• याचिकाकर्ता को पहले नोटिस दिया जाए

• उचित अवसर (fair hearing) प्रदान किया जाए

• पूरी प्रक्रिया के बाद एक “स्पीकिंग ऑर्डर” (कारण सहित आदेश) पास किया जाए

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (merits) पर कोई अंतिम राय नहीं दी है और अधिकारी कानून के अनुसार आगे कार्रवाई कर सकते हैं।

Case Details:

Case Title: K. Sreenivasulu vs State of Andhra Pradesh & Anr.

Case Number: W.P. No. 3506 of 2026

Judge: Justice Gannamaneni Ramakrishna Prasad

Decision Date: 09 April 2026

Download Order

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates