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दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि चुनाव फॉर्म में गलत शैक्षिक जानकारी देना स्वतः भ्रष्ट आचरण नहीं, 2020 चुनाव याचिका निष्फल हुई।

Rajan Prajapati
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि उम्मीदवार की अपनी शिक्षा संबंधी गलत घोषणा हर मामले में भ्रष्ट आचरण नहीं मानी जाएगी, करोल बाग याचिका निष्प्रभावी हुई। - योगेन्द्र चंदोलिया बनाम विशेष रवि एवं अन्य।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि चुनाव फॉर्म में गलत शैक्षिक जानकारी देना स्वतः भ्रष्ट आचरण नहीं, 2020 चुनाव याचिका निष्फल हुई।

दिल्ली हाईकोर्ट ने करोल बाग विधानसभा सीट से जुड़े 2020 चुनाव विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि उम्मीदवार द्वारा अपने ही शैक्षणिक योग्यता संबंधी गलत घोषणा करना, हर स्थिति में भ्रष्ट आचरण (corrupt practice) नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि अब विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और 2025 में नए चुनाव हो चुके हैं, इसलिए चुनाव याचिका निष्प्रभावी (infructuous) हो गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि विजयी उम्मीदवार ने नामांकन पत्र और Form 26 में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी दी। दावा किया गया कि इससे मतदाताओं को भ्रमित किया गया और चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ।

याचिका में कहा गया कि उम्मीदवार ने अलग-अलग चुनावों में शिक्षा संबंधी अलग-अलग दावे किए, जिससे तथ्य छिपाने और गलत जानकारी देने का मामला बनता है।

खंडपीठ ने कहा कि Representation of the People Act, 1951 की धारा 123(4) बहुत सीमित दायरे में लागू होती है। यह प्रावधान दूसरे उम्मीदवार के खिलाफ झूठे तथ्य प्रकाशित करने से जुड़ा है।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई उम्मीदवार अपनी ही शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी देता है, तो उसे सीधे धारा 123(4) के तहत भ्रष्ट आचरण नहीं माना जा सकता।

पीठ ने कहा,

“नामांकन पत्र और हलफनामे में दी गई घोषणा अपने आप में ‘publication’ नहीं मानी जा सकती।”

कोर्ट ने आगे कहा कि चुनाव याचिका सुनते समय हाईकोर्ट कानून की स्पष्ट भाषा से बंधा होता है और विस्तृत या उद्देश्यपरक व्याख्या नहीं कर सकता।

अदालत ने पुराने Nand Ram Bagri मामले का भी उल्लेख किया, लेकिन कहा कि उस फैसले के तथ्य अलग थे। वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता का दावा केवल धारा 123(4) तक सीमित था, इसलिए वह निर्णय यहां सीधे लागू नहीं होता।

हाईकोर्ट ने कहा कि उम्मीदवार के खिलाफ लगाए गए आरोप, याचिका में किए गए pleadings के आधार पर, भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं आते।

पीठ ने कहा,

“भले ही आरोप सही मान लिए जाएं, तब भी उत्तरदाता को भ्रष्ट आचरण का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।”

इसके साथ अदालत ने माना कि 2025 में नए चुनाव हो चुके हैं, इसलिए 2020 चुनाव को चुनौती देने वाली यह याचिका अब निष्प्रभावी हो चुकी है। मामले को इसी अनुसार निस्तारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया।

Case Details

Case Title: Yogender Chandolia v. Vishesh Ravi & Ors.

Case Number: EL.PET. 10/2020

Judge: Justice Dinesh Mehta and Justice Vinod Kumar

Decision Date: 24 April 2026

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