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दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस नोटिस में खामियों को उजागर करते हुए कथित उत्पीड़न मामले में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।

Rajan Prajapati
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दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस की प्रक्रिया में खामी पाते हुए याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। - सोनिया बंसल और अन्य बनाम दिल्ली राज्य और अन्य।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस नोटिस में खामियों को उजागर करते हुए कथित उत्पीड़न मामले में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई में पुलिस जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि गरीबों को अंतरिम राहत प्रदान की जाए। कोर्ट ने अगली तारीख तक उनके बिल्डर पर रोक मामले की जांच और जांच के निर्देश दिए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका सोनिया बंसल और एक अन्य द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने पुलिस द्वारा कथित उत्पीड़न और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। याचिकाकर्ता संख्या 1 का अपने पति के साथ वैवाहिक विवाद चल रहा है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पति, जो दिल्ली सचिवालय में कार्यरत हैं, अपने प्रभाव का उपयोग कर रहे हैं। उनकी शिकायत पर थाना अलीपुर में एफआईआर संख्या 158/2026 दर्ज की गई, जिसमें लगाए गए आरोप जमानती हैं।

इसके बावजूद, याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि जांच अधिकारी बेल बॉन्ड स्वीकार नहीं कर रहे और उन्हें बार-बार थाने बुलाकर परेशान किया जा रहा है।

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सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है और फिलहाल गिरफ्तारी की कोई योजना नहीं है।

हालाँकि, मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया ने मौजूदा नोटिस का हवाला देते हुए गंभीर खामी पाई दर्ज की। नोटिस में उपस्थिति का समय तो दर्ज था, लेकिन तारीख का उल्लेख नहीं किया गया था।

अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा,

“यह अत्यंत चिंताजनक है कि नोटिस में तारीख ही नहीं दी गई। इससे यह आशंका उत्पन्न होती है कि बाद में यह कहा जा सकता है कि याचिकाकर्ता जांच में शामिल नहीं हुए।”

न्यायालय ने इस नोटिस को रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया और संबंधित पुलिस उपायुक्त (DCP) को निर्देश दिया कि वे इस चूक के संबंध में उचित कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता संख्या 1 ने अपने पति द्वारा कथित हमले के संबंध में एक पीसीआर कॉल की थी।

हालांकि, पुलिस की ओर से बताया गया कि शिकायत को एक थाने से दूसरे थाने में स्थानांतरित किया गया और बाद में याचिकाकर्ता से संपर्क किया गया। इस पर अदालत ने विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई।

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मामले की परिस्थितियों और राज्य के रुख को देखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ताओं को जांच में सहयोग करना होगा और जांच अधिकारी द्वारा दिए गए लिखित निर्देशों का पालन करना होगा।

मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

Case Details

Case Title: Sonia Bansal & Anr. vs State of NCT of Delhi & Anr.

Case Number: W.P.(CRL) 1364/2026

Judge: Justice Girish Kathpalia

Decision Date: April 27, 2026

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