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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घटनास्थल पर उपस्थिति मात्र से आईपीसी की धारा 34 के तहत हत्या के आरोप में दोषसिद्धि को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल घटनास्थल पर मौजूदगी से साझा मंशा साबित नहीं होती और हत्या की सजा को बदलकर धारा 307 IPC में परिवर्तित कर दिया। - संजय सिंह बनाम मध्य प्रदेश राज्य

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घटनास्थल पर उपस्थिति मात्र से आईपीसी की धारा 34 के तहत हत्या के आरोप में दोषसिद्धि को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने 1999 के एक हत्या मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी संजय सिंह की हत्या की सजा रद्द कर दी और उसे हत्या के प्रयास के अपराध में दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि केवल घटनास्थल पर मौजूद होना या हथियार लेकर पहुंचना, धारा 34 IPC के तहत “साझा मंशा” साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के सारसी गांव का है। अभियोजन के अनुसार, 12 मई 1999 की रात करीब 9:30 बजे देशपाल सिंह पर कई लोगों ने हमला किया था। FIR में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने बंदूक और अन्य हथियारों से हमला किया। घायल देशपाल सिंह की हालत बिगड़ने के बाद अगले दिन उनकी मृत्यु हो गई।

ट्रायल कोर्ट ने 2001 में संजय सिंह और एक अन्य आरोपी महेंद्रपाल सिंह को धारा 302/34 IPC के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा।

इसके बाद संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

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जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद गवाहियों और कथित मृत्यु पूर्व बयान (dying declaration) का विस्तार से परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि किसी भी साक्ष्य में यह स्पष्ट नहीं था कि संजय सिंह ने मृतक को वह गोली मारी थी जिससे उसकी मौत हुई।

पीठ ने कहा,

“धारा 34 IPC लागू करने के लिए अभियोजन को यह साबित करना जरूरी है कि आरोपियों के बीच पहले से साझा योजना या साझा मंशा थी।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि संजय सिंह मुख्य आरोपी के साथ घटनास्थल पर नहीं पहुंचे थे और बाद में दूसरी दिशा से वहां आए थे। कोर्ट के अनुसार, यह परिस्थिति पहले से बनी किसी साझा योजना की संभावना को कमजोर करती है।

पीठ ने कहा कि घायल प्रत्यक्षदर्शी PW-6 की गवाही से भी यह साबित नहीं होता कि अपीलकर्ता ने मृतक पर गोली चलाई थी। गवाह ने बताया कि उसने आरोपी की बंदूक ऊपर की ओर मोड़ दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष धारा 302 के लिए जरूरी साझा मंशा साबित करने में असफल रहा। हालांकि अदालत ने माना कि आरोपी घटनास्थल पर हथियार के साथ मौजूद था और उसे घटना की गंभीरता का ज्ञान था।

इसी आधार पर कोर्ट ने संजय सिंह की हत्या की सजा रद्द करते हुए उसे IPC की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी लगभग 9 वर्ष 9 महीने जेल में बिता चुका है।

पीठ ने आदेश दिया कि उसे पहले से काटी गई सजा को ही पर्याप्त माना जाए और यदि किसी अन्य मामले में आवश्यकता न हो तो उसे आत्मसमर्पण करने की जरूरत नहीं होगी।

Case Details

Case Title: Sanjay Singh v. State of Madhya Pradesh

Case Number: Criminal Appeal No. 440 of 2013

Judges: Justice Sanjay Karol and Justice Augustine George Masih

Decision Date: May 8, 2026

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