Logo

यदि मुख्य गवाह की गवाही विश्वसनीय और भरोसेमंद हो, तो अन्य गवाहों के मुकर जाने के बावजूद दोषसिद्धि कायम रखी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

Rajan Prajapati
Add Court Book as a preferred source on Google

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हत्या मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए कहा कि भरोसेमंद गवाह और मौखिक dying declaration के आधार पर सजा कायम रह सकती है। - मितेश @ टी.वी. वाघेला बनाम गुजरात राज्य

यदि मुख्य गवाह की गवाही विश्वसनीय और भरोसेमंद हो, तो अन्य गवाहों के मुकर जाने के बावजूद दोषसिद्धि कायम रखी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के एक हत्या मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की अपील खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी गवाह की गवाही भरोसेमंद और सुसंगत हो, तो केवल इसी आधार पर सजा कायम रखी जा सकती है। अदालत ने यह भी माना कि मृतक द्वारा अपने भाई को दिया गया मौखिक मृत्यु पूर्व घोषणा विश्वसनीय था और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला 12 दिसंबर 1998 का है। अभियोजन के अनुसार, अहमदाबाद के खोखरा इलाके में चाय की दुकान चलाने वाले सोमाभाई रबारी और आरोपी मितेश उर्फ टी.वी. वाघेला के बीच एक रात पहले विवाद हुआ था। आरोप था कि आरोपी ने जलती हुई सिगरेट का टुकड़ा पानी की बाल्टी में फेंक दिया था, जिस पर दोनों में कहासुनी हुई।

अगली सुबह सोमाभाई गंभीर रूप से घायल अवस्था में अपनी दुकान के पास मिले। उनके भाई ईश्वरभाई रबारी ने अदालत को बताया कि घायल सोमाभाई ने रास्ते में और मौके पर कई बार आरोपी का नाम लिया और कहा कि उसी ने चाकू से हमला किया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गुजरात हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अभियोजन का मामला कमजोर है क्योंकि कई पंच और कथित प्रत्यक्षदर्शी गवाह अपने पहले के बयान से मुकर गए थे। यह भी कहा गया कि मृतक की हालत ऐसी नहीं थी कि वह किसी का नाम बता सके। बचाव पक्ष ने मेडिकल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों में विरोधाभास होने का भी दावा किया।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि मामले में दो अहम गवाहों-PW-1 और PW-12-की गवाही पूरी तरह भरोसेमंद रही।

अदालत ने कहा,

“भारतीय कानूनी व्यवस्था में गवाहों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गवाही की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है।”

पीठ ने माना कि मृतक द्वारा अपने भाई को दिया गया मौखिक मृत्यु पूर्व घोषणा स्वाभाविक और विश्वसनीय था। अदालत ने यह भी कहा कि केवल इसलिए इस बयान को खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि मेडिकल रिकॉर्ड में आरोपी का नाम दर्ज नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने रिक्शा चालक PW-12 की गवाही को भी “स्टर्लिंग गुणवत्ता” बताते हुए कहा कि उसने घटना का स्पष्ट और लगातार विवरण दिया तथा जिरह के दौरान उसका बयान नहीं डगमगाया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट दोनों ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया था और अभियोजन आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी की अपील खारिज कर दी।

हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आरोपी यदि चाहे तो प्रचलित नीति के तहत remission (सजा में रियायत) के लिए आवेदन दे सकता है, जिसे कानून के अनुसार शीघ्र निपटाया जाएगा।

Case Details:

Case Title: Mitesh @ T.V. Vaghela v. State of Gujarat

Case Number: Criminal Appeal No. 212 of 2012

Judges: Justice Aravind Kumar and Justice Prasanna B. Varale

Decision Date: May 11, 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates