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महाकुंभ भगदड़ मुआवजा मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रशासन को 3 हफ्ते में फैसला लेने का दिया निर्देश

Rajan Prajapati
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ भगदड़ मुआवजा मामले में मेला अधिकारी को 3 सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया, आयोग की भूमिका सीमित बताई। - संजय कुमार शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य

महाकुंभ भगदड़ मुआवजा मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रशासन को 3 हफ्ते में फैसला लेने का दिया निर्देश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने महाकुंभ मेले के दौरान कथित भगदड़ में हुई मृत्यु से जुड़े मुआवजा दावे पर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत मुआवजा दावों पर निर्णय लेना प्रशासनिक अधिकारी का दायित्व है, न कि न्यायिक जांच आयोग का।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका महाकुंभ 2025 के दौरान कथित भगदड़ में एक महिला, शिवा देवी, की मृत्यु के बाद मुआवजा दिए जाने को लेकर दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मृतक की मौत भगदड़ में हुई और उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

मामले में पहले न्यायिक जांच आयोग के समक्ष भी कुछ गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। हालांकि, आयोग ने यह स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत मुआवजा दावों का निपटारा उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच आयोग की भूमिका और प्रशासनिक जिम्मेदारी के बीच स्पष्ट अंतर किया।

पीठ ने कहा,

“जांच आयोग का कार्य केवल व्यापक तथ्यों की जांच करना है, न कि व्यक्तिगत मुआवजा दावों का निपटारा करना।”

कोर्ट ने यह भी माना कि आयोग के समक्ष दिए गए बयान केवल संदर्भ के लिए हैं और उन्हें व्यक्तिगत दावों के अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जा सकता।

इसके साथ ही, अदालत ने महत्वपूर्ण दस्तावेजों-जैसे पुलिस द्वारा तैयार की गई इनक्वेस्ट रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट-को निर्णायक माना, जब तक कि उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत न किया जाए।

पीठ ने कहा,

“इनक्वेस्ट रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे दस्तावेजों को तब तक निर्विवाद माना जाएगा, जब तक उनके विपरीत कोई ठोस सामग्री प्रस्तुत न की जाए।”

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि:

• न्यायिक जांच आयोग केवल व्यापक जांच करेगा

• व्यक्तिगत मुआवजा दावों का निर्णय मेला अधिकारी (Meladhikari) को करना होगा

• आयोग के समक्ष दिए गए बयान केवल संदर्भ के लिए होंगे

यह भी कहा गया कि मुआवजा तय करने की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर ही पूरी की जानी चाहिए।

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मामले के तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों को देखते हुए, अदालत ने मेला अधिकारी को निर्देश दिया कि:

“मुआवजा दावे पर तीन सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए।”

इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि संबंधित अधिकारी अगली सुनवाई से पहले अनुपालन हलफनामा दाखिल करें।

अंततः, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए प्रशासनिक अधिकारी को स्पष्ट समयसीमा में निर्णय लेने का निर्देश दिया और मामले को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

Case Details

Case Title: Sanjay Kumar Sharma vs State of UP & Others

Case Number: WRIT - C No. 38751 of 2025

Judge: Hon’ble Ajit Kumar, J. and Hon’ble Satya Veer Singh, J.

Decision Date: 13 April 2026

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