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मासिक धर्म स्वच्छता अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है; सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को पूर्ण और प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया

CB News Desk
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता Article 21 के तहत मौलिक अधिकार है और केंद्र व राज्यों को स्कूलों में इसकी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। - डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत संघ एवं अन्य

मासिक धर्म स्वच्छता अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है; सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को पूर्ण और प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (Menstrual Hygiene Management) से जुड़े अपने पूर्व निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता महिलाओं और किशोरियों के गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का हिस्सा है और इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना जा चुका है।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले की सुनवाई कर रही थी।

मामले की पृष्ठभूमि

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एक अनुपालन रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें बताया गया कि 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जानकारी प्राप्त की गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय, सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता, सुरक्षित निस्तारण व्यवस्था, जागरूकता कार्यक्रम और मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।

केंद्र ने यह भी बताया कि विभिन्न राज्यों ने स्थानीय स्तर पर कई नवाचार शुरू किए हैं, जिनमें "केयर एंड कम्फर्ट रूम", "पिंक टॉयलेट", सैनिटरी पैड एटीएम, किशोरी मेले और जागरूकता अभियान शामिल हैं।

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याचिकाकर्ता की ओर से पेश नोट में कहा गया कि कई सरकारी स्कूलों में अब भी कार्यशील बालिका शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। यह भी तर्क दिया गया कि केंद्र की रिपोर्ट में वास्तविक जमीनी स्थिति के बजाय भविष्य की योजनाओं और नीतिगत कदमों पर अधिक जोर दिया गया है।

नोट में यह भी कहा गया कि कुछ राज्यों द्वारा इस दिशा में पर्याप्त बजट आवंटित नहीं किया गया है और कई स्थानों पर स्वच्छता व्यवस्था स्थानीय निकायों पर निर्भर है।

पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा इंगित कमियों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा, “हम पहले ही मासिक धर्म स्वच्छता को मौलिक अधिकार घोषित कर चुके हैं। दूसरे शब्दों में, यह संविधान के अनुच्छेद 21 का एक हिस्सा है।”

पीठ ने आगे कहा कि केवल अधिकार घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है।

अदालत ने टिप्पणी की, “केवल घोषणा कर देने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। केंद्र और सभी राज्य सरकारों को सकारात्मक तरीके से काम करना होगा ताकि यह मौलिक अधिकार वास्तव में प्रभावी और सार्थक बन सके।”

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों का अध्ययन करे और उन पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करे। अदालत ने कहा कि इस संबंध में किसी भी प्रकार की ढिलाई को गंभीरता से देखा जाएगा।

पीठ ने केंद्र को राज्यों के साथ समन्वय बनाए रखते हुए अनुपालन की निगरानी जारी रखने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि प्रत्येक तीन महीने में नई प्रगति रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

अदालत ने सभी राज्य सरकारों को 15 अगस्त 2026 तक अपनी स्थिति रिपोर्ट संबंधित केंद्रीय मंत्रालय को सौंपने का निर्देश दिया। आगे की अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए शिक्षा मंत्रालय को नोडल मंत्रालय नामित किया गया है।

मामले को आगे की अनुपालन समीक्षा के लिए 1 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।

Case Details:

Case Title: Dr. Jaya Thakur v. Government of India & Ors.

Case Number: Writ Petition (Civil) No. 1000/2022

Judges: Justice J.B. Pardiwala and Justice R. Mahadevan

Decision Date: 25 May 2026

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