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मनीकंट्रोल ट्रेडमार्क का दुरुपयोग: दिल्ली उच्च न्यायालय ने व्हाट्सएप घोटाले के नेटवर्क को बंद किया

Shivam
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नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड बनाम कृष्णा @ जगतार सिंह और अन्य - दिल्ली उच्च न्यायालय ने मनीकंट्रोल घोटाले के मामले में नेटवर्क18 के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा जारी की; व्हाट्सएप और दूरसंचार कंपनियों को फर्जी ट्रेडिंग समूहों से जुड़े नंबरों को ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया।

मनीकंट्रोल ट्रेडमार्क का दुरुपयोग: दिल्ली उच्च न्यायालय ने व्हाट्सएप घोटाले के नेटवर्क को बंद किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के पक्ष में एक स्थायी निषेधाज्ञा जारी की है, जब पाया गया कि कई व्यक्तियों ने उसके ट्रेडमार्क “Moneycontrol” का गलत उपयोग करते हुए फर्जी व्हाट्सऐप निवेश समूह चलाए। यह आदेश 19 दिसंबर 2025 को न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा द्वारा पारित किया गया।

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मामले की पृष्ठभूमि

मनीकंट्रोल प्लेटफॉर्म चलाने वाली नेटवर्क18 ने अदालत का रुख तब किया जब जनता से शिकायतें मिलने लगीं। वादी के अनुसार, कुछ लोगों ने खुद को मनीकंट्रोल का कर्मचारी बताकर व्हाट्सऐप समूहों में नागरिकों को शामिल किया और उन्हें “CINV – The Premier Strategy Group” जैसे नामों से जोड़कर अवास्तविक स्टॉक मार्केट रिटर्न और उपहारों का लालच दिया।

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अदालती रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि इन समूहों ने बड़े वित्तीय संस्थानों से जुड़ाव का झूठा दावा किया और “सप्ताह में 30% रिटर्न” तथा एक तथाकथित ‘विशेषज्ञ प्रशिक्षण’ के जरिए 500% मुनाफे का वादा किया।

अदालत की टिप्पणियाँ

प्रतिवादी संख्या 1 से 21 को इलेक्ट्रॉनिक सेवा के बावजूद कभी अदालत में पेश नहीं हुए। उन्होंने न तो जवाब दाखिल किया और न ही अपना पक्ष रखा, जिसके कारण अदालत ने उन्हें एक्स-पार्टी कर दिया।

न्यायालय ने माना कि इन गतिविधियों का उद्देश्य जनता को भ्रमित करना था:

“प्रतिवादियों की गतिविधियाँ स्पष्ट रूप से यह दर्शाती हैं कि वे वादी से सीधे संबंध या स्वीकृति दिखाने की कोशिश कर रहे थे… और यह गलत प्रस्तुतीकरण कर रहे थे कि सेवाएँ लाइसेंस प्राप्त या स्वीकृत हैं।”

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अदालत ने सिविल प्रक्रिया संहिता (Order VIII Rule 10 CPC) का हवाला देते हुए कहा कि जब प्रतिवादी जवाब दाखिल नहीं करते, तो बिना मुकदमे के भी निर्णय दिया जा सकता है।

मुख्य निर्देश

हाई कोर्ट ने स्थायी निषेधाज्ञा जारी करते हुए पहले दिए गए अवरोधन आदेशों को भी मजबूत किया:

• “Moneycontrol” या मिलते-जुलते किसी नाम/चिह्न के उपयोग पर स्थायी रोक

• व्हाट्सऐप (प्रतिवादी 22) को संबंधित खातों को एक वर्ष के लिए ब्लॉक करने का निर्देश

• वोडाफोन-आइडिया, एयरटेल, जियो को जुड़े मोबाइल नंबरों को एक वर्ष के लिए ब्लॉक करने और उन्हीं KYC धारकों को पुनः न देने का आदेश

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अदालत ने यह भी कहा कि स्थायी रूप से मोबाइल नंबर जब्त करना आवश्यक नहीं है, बल्कि समय-सीमा आधारित रोक ही पर्याप्त है।

“एक वर्ष की अतिरिक्त अवधि एक ठंडा-काल के रूप में कार्य करेगी और प्रतिवादियों के लिए हतोत्साहन का कारण बनेगी…”

अंतिम निर्णय

मामले का निपटारा किया गया और नेटवर्क18 के पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा जारी की गई। इस चरण में क्षतिपूर्ति की मांग नहीं बढ़ाई गई, लेकिन भविष्य में दावा करने का अधिकार सुरक्षित रखा गया है।

Case Title: Network18 Media & Investments Ltd. vs. Krishnaa @ Jagtar Singh & Others

Case Number: CS(COMM) 328/2024

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