Logo

बैंक की मनमानी पर हाईकोर्ट सख्त: compassionate appointment ठुकराना अवैध, आदेश रद्द

Rajan Prajapati
Add Court Book as a preferred source on Google

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बैंक द्वारा compassionate appointment ठुकराने के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवार को राहत देना है। - निखिल कोल बनाम यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और अन्य

बैंक की मनमानी पर हाईकोर्ट सख्त: compassionate appointment ठुकराना अवैध, आदेश रद्द

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में बैंक द्वारा compassionate appointment (मृत कर्मचारी के आश्रित को नौकरी) ठुकराने के आदेश को अवैध ठहराया है। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवार को राहत देना है, न कि तकनीकी कारणों से उन्हें वंचित करना।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एक युवा याचिकाकर्ता निखिल कोल से जुड़ा है, जिनके पिता यूनियन बैंक में ‘दफ्तरी’ पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 22 साल से अधिक सेवा दी, लेकिन 7 अगस्त 2016 को अचानक हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया।

पिता की मृत्यु के बाद पूरा परिवार आर्थिक संकट में आ गया। याचिकाकर्ता परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य बन सकते थे, इसलिए उन्होंने compassionate appointment के तहत नौकरी के लिए आवेदन किया।

हालांकि, बैंक ने 30 जनवरी 2018 को उनका आवेदन खारिज कर दिया। कारण बताया गया-मृत कर्मचारी का “असंतोषजनक सेवा रिकॉर्ड”।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दलील दी कि बैंक का यह आधार पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि योजना में कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं है कि कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड के आधार पर आश्रित को नौकरी से वंचित किया जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि उनका परिवार पूरी तरह निर्भर था और आज भी गंभीर आर्थिक कठिनाई झेल रहा है।

Read also:- दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिगों के साथ यौन अपराध मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी, अपील खारिज

सुनवाई के दौरान अदालत ने बैंक के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की।

कोर्ट ने कहा,

“compassionate appointment योजना का मूल उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तुरंत आर्थिक सहारा देना है। इसमें बाहरी या मनगढ़ंत कारण जोड़कर आवेदन खारिज करना उचित नहीं है।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना ठोस कारणों के, केवल “cryptic” (अस्पष्ट) आदेश जारी करना कानून के खिलाफ है।

कोर्ट ने कहा,

“ऐसे मामलों में अधिकारियों को स्पष्ट और ठोस कारण दर्ज करना अनिवार्य है, ताकि मनमानी पर रोक लगाई जा सके।”

हाईकोर्ट ने बैंक का 30 जनवरी 2018 का आदेश रद्द कर दिया।

अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर नियमों के अनुसार पुनर्विचार किया जाए और उचित निर्णय लिया जाए।

साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में बिना कारण या योजना के बाहर जाकर लिए गए फैसलों को गंभीरता से देखा जाएगा।

याचिका को इन निर्देशों के साथ स्वीकार कर लिया गया।

Case Details

Case Title: Nikhil Kol vs Union Bank of India & Others

Case Number: W.P. No. 794 of 2019

Judge: माननीय न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई

Decision Date: 24 अप्रैल 2026

Download Order

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates