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नगरपालिका सीमाओं का निर्धारण विधायी प्रक्रिया; सिविल कोर्ट में चुनौती अस्वीकार्य: सुप्रीम कोर्ट

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने उचगांव पंचायत की अपील खारिज करते हुए कहा कि नगर सीमा निर्धारण जैसे मामलों में सिविल कोर्ट का अधिकार नहीं होता। - उंचगाँव ग्राम पंचायत बनाम कोल्हापुर नगर निगम

नगरपालिका सीमाओं का निर्धारण विधायी प्रक्रिया; सिविल कोर्ट में चुनौती अस्वीकार्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने उचगांव गांव पंचायत और कोल्हापुर नगर निगम के बीच लंबे समय से चल रहे अधिकार क्षेत्र विवाद पर अंतिम मुहर लगा दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में सिविल कोर्ट दखल नहीं दे सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद महाराष्ट्र के उचगांव गांव की कुछ जमीनों को लेकर शुरू हुआ था। पंचायत का दावा था कि ये जमीनें उसके अधिकार क्षेत्र में आती हैं, जबकि कोल्हापुर नगर निगम ने 2013 में एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर इन्हें नगर सीमा के भीतर बताया।

पंचायत ने सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर इस कार्रवाई को चुनौती दी और निर्माणों को तोड़े जाने से रोकने की मांग की। शुरुआत में सिविल कोर्ट ने पंचायत के पक्ष में अंतरिम राहत भी दी, लेकिन बाद में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए मामला खारिज कर दिया कि सिविल कोर्ट के पास इस विवाद को सुनने का अधिकार ही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन शामिल थे, ने मामले की प्रकृति पर विस्तार से विचार किया।

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अदालत ने कहा कि नगर सीमा तय करना या उसमें बदलाव करना एक “विधायी कार्य” (legislative function) है, जो राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे निर्णयों को सिविल मुकदमे के जरिए चुनौती नहीं दी जा सकती।

पीठ ने स्पष्ट किया,

“विवाद का मूल मुद्दा नगर सीमा के निर्धारण से जुड़ा है, जो सिविल कोर्ट के दायरे से बाहर है।”

अदालत ने यह भी माना कि संबंधित भूमि को लेकर पुराने सरकारी नोटिफिकेशन 1940 के दशक से लागू रहे हैं, और इतने वर्षों बाद इस पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

साथ ही, न्यायालय ने कहा कि भले ही मामले में कुछ तथ्यात्मक विवाद हों, लेकिन यदि उनका समाधान कानून के तहत निर्धारित अधिकारों की वैधता पर निर्भर करता है, तो सिविल कोर्ट इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया और पंचायत की अपीलों को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा कि सिविल कोर्ट के पास इस प्रकार के विवाद को सुनने का अधिकार नहीं था, इसलिए मुकदमा बनाए रखने का कोई आधार नहीं है।

इसके साथ ही, पहले दिया गया यथास्थिति (status quo) आदेश भी समाप्त कर दिया गया और संबंधित अवमानना याचिका को भी निष्प्रभावी मानते हुए निस्तारित कर दिया गया।

Case Details

Case Title: Unchgaon Village Panchayat vs Kolhapur Municipal Corporation

Case Number: Civil Appeal No. 4684 of 2026 (arising out of SLP (C) No. 10001/2018)

Judges: Justice Prashant Kumar Mishra and Justice K.V. Viswanathan

Decision Date: April 22, 2026

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