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बीएनएसएस के तहत एनडीपीएस शिकायत मामलों में संज्ञान लेने से पहले आरोपी की सुनवाई अनिवार्य: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

Shivam
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि BNSS की धारा 223 के तहत आरोपी को सुनवाई का मौका दिए बिना NDPS शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता। - शत्रुघ्न कुमार बनाम नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, अपने क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ के माध्यम से

बीएनएसएस के तहत एनडीपीएस शिकायत मामलों में संज्ञान लेने से पहले आरोपी की सुनवाई अनिवार्य: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा है कि BNSS की धारा 223(1) के तहत किसी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। कोर्ट ने NDPS मामले में पारित संज्ञान आदेश को इसी आधार पर रद्द कर दिया कि आरोपी को पहले सुना ही नहीं गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला शत्रुघ्न कुमार द्वारा दायर उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें 14 जुलाई 2025 को स्पेशल जज, NDPS एक्ट, लखनऊ द्वारा पारित संज्ञान आदेश को चुनौती दी गई थी। मामला NDPS Act की धाराओं 8(c), 20, 27A और 29 से संबंधित था।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा दायर शिकायत पर अदालत ने बिना सुनवाई का मौका दिए सीधे संज्ञान ले लिया, जबकि BNSS लागू होने के बाद धारा 223(1) का पहला प्रावधान ऐसा करने से पहले आरोपी को सुनवाई का अधिकार देता है।

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि यह शिकायत जुलाई 2024 के बाद दाखिल हुई थी, इसलिए BNSS की नई प्रक्रिया का पालन करना जरूरी था। इसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला भी दिया गया।

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NCB की ओर से कहा गया कि आरोपी को 14 जुलाई 2025 को ही रिमांड पर भेजा गया था और बाद में 8 अगस्त 2025 को आरोप भी तय हो चुके थे। एजेंसी का कहना था कि आरोपी के पास पहले आदेश को चुनौती देने का मौका था, इसलिए अब यह नहीं कहा जा सकता कि उसे सुनवाई का अवसर नहीं मिला।

न्यायमूर्ति बृज राज सिंह ने BNSS की धारा 223 और NDPS Act की धारा 36A(1)(d) का विस्तार से परीक्षण किया। कोर्ट ने कहा कि NDPS Act का यह प्रावधान PMLA की धारा 44(1)(b) के समान है और सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ऐसे मामलों में BNSS की प्रक्रिया लागू होगी।

कोर्ट ने पाया कि स्पेशल जज के आदेश में केवल इतना लिखा था कि शिकायत और दस्तावेजों का अवलोकन किया गया। आदेश में कहीं यह नहीं दिखा कि आरोपी को आपत्ति दाखिल करने या अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था।

कोर्ट ने कहा,

“आरोपी को आपत्ति दाखिल करने का अवसर देकर सुनवाई की जा सकती थी और उसके बाद कारणयुक्त आदेश पारित किया जा सकता था।”

हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए 14 जुलाई 2025 का संज्ञान आदेश याचिकाकर्ता के संबंध में रद्द कर दिया। साथ ही आरोपी को 29 मई 2026 को स्पेशल जज के समक्ष उपस्थित होकर अपनी आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

अदालत ने स्पेशल कोर्ट को दोनों पक्षों को सुनने के बाद कानून के अनुसार नया आदेश पारित करने को कहा।

Case Details:

Case Title: Shatrughan Kumar vs Narcotics Control Bureau Through Its Regional Office, Lucknow

Case Number: Application U/S 528 BNSS No. 1880 of 2026

Judge: Justice Brij Raj Singh

Decision Date: May 19, 2026

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