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सरकारी ग्रांट से जुड़े मामलों में किराया कानून लागू नहीं होगा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के खिलाफ बेदखली आदेश रद्द किया।

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी ग्रांट से जुड़े मामलों में किराया कानून लागू नहीं होगा और अधिकार केवल ग्रांट की शर्तों से तय होंगे।- भारत संघ बनाम सर शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड

सरकारी ग्रांट से जुड़े मामलों में किराया कानून लागू नहीं होगा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के खिलाफ बेदखली आदेश रद्द किया।

नई दिल्ली में स्थित सुजान सिंह पार्क की संपत्तियों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जहां संपत्ति का संबंध सरकारी ग्रांट से है, वहां सामान्य किरायेदारी कानून लागू नहीं होगा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 1945 की एक स्थायी लीज डीड से जुड़ा है, जिसके तहत जमीन निजी कंपनी को दी गई थी। बाद में केंद्र सरकार ने इन परिसरों का उपयोग अपने अधिकारियों के आवास के रूप में किया।

कंपनी का कहना था कि सरकार किरायेदार के रूप में रह रही है और किराया न चुकाने पर उसे बेदखल किया जा सकता है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि उसका कब्जा सीधे सरकारी ग्रांट से उत्पन्न हुआ है, इसलिए यह साधारण किरायेदारी नहीं है।

एडिशनल रेंट कंट्रोलर और रेंट ट्रिब्यूनल ने माना कि दोनों पक्षों के बीच मकान मालिक–किरायेदार का संबंध है। किराया न चुकाने के आधार पर बेदखली का आदेश भी दिया गया।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस निष्कर्ष को बरकरार रखा और कहा कि किराया नियंत्रण कानून लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे विवाद का केंद्र बिंदु सरकारी ग्रांट के स्वरूप को माना।

पीठ ने कहा,

“सरकारी ग्रांट के तहत दिए गए अधिकार और दायित्व उसी ग्रांट की शर्तों से तय होंगे, किसी अन्य कानून से नहीं।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी अनुदान अधिनियम की धारा 3 का दायरा व्यापक है और यह अन्य कानूनों पर भी प्रभावी हो सकती है।

“ग्रांट की शर्तें सर्वोपरि हैं, भले ही वे किसी अन्य कानून से असंगत क्यों न हों,” कोर्ट ने कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि निचली अदालतों और हाईकोर्ट ने इस मामले को सामान्य किरायेदारी विवाद मानकर देखा, जबकि यह एक सरकारी ग्रांट से उत्पन्न संबंध था।

कोर्ट ने कहा कि केवल किराया भुगतान होने से संबंध को किरायेदारी नहीं माना जा सकता, यदि उसका आधार सरकारी ग्रांट है।

साथ ही, लीज डीड में किराया न देने पर बेदखली का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। ऐसे में बेदखली का अधिकार स्वतः नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।

अदालत ने कहा कि दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट इस मामले पर लागू नहीं होता, इसलिए उसके तहत शुरू की गई बेदखली कार्यवाही अवैध है।

हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कंपनी कानून के अनुसार अन्य उचित उपाय अपनाने के लिए स्वतंत्र है।

Case Details:

Case Title: Union of India vs Sir Sobha Singh & Sons Pvt. Ltd.

Case Number: Civil Appeal No. 4686 of 2026 (arising out of SLP (C) No. 5629 of 2022)

Judges: Justice Sanjay Karol, Justice Prashant Kumar Mishra

Decision Date: April 22, 2026

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